रेलवे अफसर सुनील कुमार बलूनी की आत्महत्या के मामले में रेलवे विजिलेंस और दलालों की भूमिका लगातार सवालों में घिर रही है। रेलवे में उच्च स्तर पर चल रही गोपनीय जांच में इसकी परतें धीरे-धीरे उधड़ रही हैं।
रेलवे विजिलेंस की मिलीभगत
घूसखोरी के केस में फंसाने से क्षुब्ध रेलवे के सीनियर ट्रैफिक इंस्पेक्टर (एकाउंट) सुनील बलूनी ने दो दिसंबर को ट्रेन से कटकर जान दे दी थी। बलूनी ने इसके लिए स्टेशन पर सक्रिय दलालों और रेलवे विजिलेंस की मिलीभगत को जिम्मेदार बताया है।
इसके बाद रेलवे में उच्च स्तर पर हलचल है। सूत्रों के अनुसार, रेलवे के बड़ौदा हाउस, दिल्ली स्थित मुख्यालय से अधिकारियों की एक टीम लगातार मामले पर नजर रखे हुए है। टीम ने दलालों की ओर से विजिलेंस को दिए गए शिकायती पत्र की छानबीन भी की है।
सूत्रों से पता लगा है कि शिकायतकर्ताओं का कहना था कि क्षमता से अधिक सामान लाने और इसे स्टेशन से पार लगाने के एवज में दून स्टेशन पर रिश्वत ली जाती रही है। इससे विजिलेंस की एकतरफा कार्रवाई पर सवाल खड़ा हो गया है, क्योंकि घूस देना भी अपराध है।
रेलवे के एक अफसर का कहना है कि जांच में यह सवाल उठा है कि विजिलेंस ने बलूनी पर कार्रवाई के साथ लंबे समय से रिश्वत दे रहे लोगों पर भी शिकंजा क्यों नहीं कसा। माना जा रहा है कि इस बिंदु पर जांच बढ़ी, तो कई पर गाज गिर सकती है।
गहन जांच के बाद आ रहा सामान
अफसर की मौत के बाद रेलवे अब ट्रेनों में लीज पर आने वाले सामान की खूब पड़ताल कर रहा है। अब तोल और दस्तावेजों की गहन जांच के बाद ही सामान को ट्रेन में रखने की हरी झंडी दिखाई जा रही है।
पार्सल सेक्शन के पास लगेगा कैमरा
सूत्रों के अनुसार, रेलवे अब पार्सल दफ्तर के बाहर सीसीटीवी कैमरा लगाने की तैयारी कर रहा है। ताकि वहां पर सक्रिय दलालों पर नजर रखी जा सके। साथ ही वहां से आने-जाने वाले सामान की भी तस्वीरें कैमरे में कैद हो सकेंगी।