चर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड में मंगलवार को अदालत में सीबीआई की नई दिल्ली स्थित फोरेंसिक लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक और दो सेलुलर कंपनियों के नोडल अधिकारियों के बयान दर्ज हुए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 11 जून की तारीख निर्धारित की है।
वैज्ञानिकों ने दर्ज किए बयान
मंगलवार को फोरेंसिक लैब के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीके महापात्रा अदालत में पेश हुए। डॉ. महापात्रा ने हत्याकांड में प्रयुक्त स्टोन कटर, डीप फ्रीजर, बैग आदि से मिले ब्लड सैंपल का मिलान अनुपमा के माता-पिता के ब्लड सैंपल से किया था। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने अनुपमा को माता-पिता की जैविक पुत्री बताया है।
बचाव पक्ष की ओर से उठाए सवालों के जवाब में उन्होंने अपनी रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। दो सेलुलर कंपनियों की ओर से मेरठ से नोडल अधिकारी अश्वनी कुमार और नोएडा से नोडल अधिकारी मोहम्मद हुसैन जैदी भी अदालत में पेश हुए।
आरोपी राजेश गुलाटी ने घटना के समय अनुपमा के मायके में होने की बात कही थी। परंतु दोनों नोडल अधिकारियों ने बताया कि जो सिम कार्ड अनुपमा के बताए थे उनकी लोकेशन राजेश के घर की थी।
यह था मामला
पुलिस के मुताबिक वर्ष 2010 में साफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने पत्नी अनुपमा गुलाटी की हत्या की। प्रकाश विहार निवासी राजेश गुलाटी ने पत्नी की हत्या के बाद शव के टुकड़े-टुकड़े कर डीप फ्रीजर में रखे। इन टुकड़ों को एक-एक कर जंगल में फेंकता रहा। इसमें से एक टुकड़ा पुलिस को मसूरी रोड के जंगल से बरामद हुआ था।
अनुपमा हत्याकांड का खुलासा तब हुआ जब उनका भाई सुजान प्रधान अपने दोस्त के साथ अपनी बहन से मिलने दून आए। हत्याकांड के खुलासे वाले दिन ही पुलिस ने आरोपी राजेश गुलाटी को गिरफ्तार कर लिया था। तब से वह जेल में है।