देहरादून के नकरौंदा हत्याकांड में अगर लोग थोड़ी हिम्मत दिखाते तो सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र सिंह थपलियाल के आवास पर डकैती और बेटे अंकित थपलियाल को मारने वाले बदमाश उसी दिन पकड़े जाते।
छतों पर मौजूद लोग चुपचाप देखते रहे
पकड़े गए तीनों बदमाशों ने पूछताछ में लोगों की आंखों के सामने फरार होने की बात बयां की है। 10 सितंबर को वारदात को अंजाम देने के बाद यह लोग कई गलियों से गुजरे, लेकिन टहलते और छतों पर मौजूद लोग चुपचाप देखते रहे।
आरोपी नदीम ने डीजीपी की मौजूदगी में कहा था कि भागते समय उन्हें कुछ लोगों मार्निंग वॉक करते हुए मिले थे, जबकि कुछ लोग छतों से उन्हें भागते हुए देख रहे थे। साजिद ने भी पूछताछ में यही बात कही है। नाले के रास्ते थपलियाल के घर तक पहुंचे बदमाशों ने भागते समय आबादी वाला रास्ता चुना था।
एक-एक कर उन्होंने विवेक विहार की पांच गलियां पार की। यही नहीं एक फैक्ट्री के मजदूरों से बदमाशों का आमना-सामना भी हुआ, लेकिन किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की। यदि उस समय लोगों ने शोर ही मचा दिया होता तो शायद नतीजा कुछ और ही होता।
घटना की सूचना के 15 मिनट बाद पुलिस भी मौके पर पहुंच र्गई थी। लेकिन, बदमाश पास के जंगल में छह घंटे तक छिपे रहे और फिर हाईवे से सिटी बस में फरार हो गए।
यह कहना मुश्किल है कि उस समय क्या स्थिति थी। हम जानते हैं कि बदमाशों का मुकाबला संभव नहीं था, लेकिन लोग सिर्फ शोर ही मचा देते तो स्थिति दूसरी होती। क्राइम कंट्रोल के लिए लोगों का सहयोग जरूरी है।
- राम सिंह मीणा, एडीजी कानून व्यवस्था