धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए निखिल अग्रवाल से पूछताछ में कई रोचक जानकारियां सामने आई हैं। विदेश में रहने वाले अपने भाई की धामपुर बिजनौर में स्थित संपत्ति को फर्जी पावर ऑफ अटार्नी पर बेचने के आरोपी निखिल को फर्जी दस्तावेज बनवाने में ज्वालापुर के कई अन्य लोगों ने भी मदद की थी। धामपुर पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।
नीलखुदाना ज्वालापुर में रह रहे निखिल अग्रवाल को जेल भेजने के बाद अब अन्य लोगों की तलाश में जुटे धामपुर के प्रभारी निरीक्षक राजकुमार राणा ने बताया कि मूल रूप से धामपुर निवासी आशीष अग्रवाल और निखिल अग्रवाल दोनों भाई हैं। आशीष लंबे समय से यूएसए में परिवार सहित रहता है। जबकि उनकी धामपुर स्थित पैतृक संपत्ति का आधा आधा बंटवारा हो चुका है।
आशीष का एक मकान नीलखुदाना ज्वालापुर में स्थित है। जिसमें निखिल अपने परिवार के साथ रहता है। उसके मामा भी ज्वालापुर के रहने वाले हैं। बताया कि निखिल ने जुए में काफी पैसा गवां दिया था। इसकी भरपाई करने के लिए उसने यूएसए में रहने वाले आशीष के नाम से एक फर्जी पावर ऑफ अटार्नी बनवाई और उसके आधार पर आशीष की धामपुर स्थित करीब साढ़े चार बीघा जमीन पिछले साल मार्च में बेच दी।
इसका पता चलने पर आशीष ने सितंबर माह में धामपुर आकर अपने भाई के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। तब से ही पुलिस निखिल की तलाश कर रही थी। बीती रात उसकी तलाश में ज्वालापुर में छापेमारी की गई और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
प्रभारी निरीक्षक के अनुसार निखिल ने बताया कि ज्वालापुर के ही रहने वाले कुछ लोगों ने फर्जी दस्तावेज बनवाने में उसकी मदद की थी। इन लोगों की भी पुलिस तलाश कर रही है। जांच के बाद उनकी भूमिका देखते हुए मुकदमे में शामिल किया जा सकता है।