ई-वे बिल में राज्य के पांच हजार पंजीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के ई-वे बिल प्रणाली में राज्य के पांच हजार व्यापारियों ने पंजीकरण कर लिया है। चार दिन में ही व्यापारियों ने अपना माल दूसरे राज्यों में भेजने के लिए 15 हजार से अधिक ई-वे बिल जनरेट किए हैं। ट्रायल के दौरान व्यापारियों की तरफ से अच्छा रिस्पांस मिलने से राज्य कर विभाग को उम्मीद है कि ई-वे बिल लागू करने में उत्तराखंड कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ देगा। हालांकि जीएसटी काउंसिल ने एक फरवरी से पूरे देश में ई-वे बिल को लागू करने का फैसला लिया है।
राज्य कर विभाग ने 15 दिसंबर से ट्रायल के तौर पर ई-वे बिल सिस्टम को शुरू किया है। चार दिनों के भीतर ही प्रदेश के पांच हजार व्यापारियों ने ई-वे बिल के लिए अपना पंजीकरण कराया है। जिसके बाद व्यापारियों ने 15 हजार से अधिक ई-वे बिल जनरेट किए। जीएसटी प्रणाली में माल को एक राज्य से दूसरे राज्य में भेजने के लिए ई-वे बिल भरना अनिवार्य है। बिना ई-वे बिल के व्यापारी अपना माल न तो बाहर भेज सकता है और न ही मंगवा सकता है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र (एनआईसी) ने ई-वे बिल सिस्टम का साफ्टवेयर तैयार किया। कर्नाटक ने सबसे पहले इस सिस्टम को लागू किया। इसी तर्ज पर उत्तराखंड ने भी ई-वे बिल साफ्टवेयर को अपने यहां ट्रायल के आधार पर शुरू किया है। व्यापारी साधारण एसएमएस के माध्यम से भी ई-वे बिल में पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण होने के बाद व्यापारी को बाहर भेजे जाने वाले सामान का ई-वे बिल जनरेट करना होगा। जिसमें माल भेजने और प्राप्त करने वाले दोनों व्यापारियों का जीएसटीएन नंबर अंकित करने के साथ ही माल की श्रेणी, वाहन का नंबर आदि जानकारी भी देनी होगी। जिस वाहन से माल भेजा जा रहा है, यदि वह रास्ते में खराब हो जाता है। उसकी जगह जिस वाहन से आगे माल भेजा जाएगा। उस वाहन का नंबर जनरेट ई-वे बिल में अपडेट करना होगा। राज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर एसएस तिरुवा ने बताया कि ट्रायल के दौरान ही चार दिन में ई-वे बिल में पांच हजार व्यापारी पंजीकरण करा चुके हैं।