- सेलाकुई स्थित एक शराब कैंटीन में कर रहे थे काम
- लेबर इंस्पेेक्टर तहरीर पर कैंटीन मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
सेलाकुई। बाल संरक्षण आयोग की टीम ने बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्यों के साथ मिलकर बुधवार को सेलाकुई स्थित एक शराब की कैंटीन में काम कर रहे आठ बाल बच्चों मुक्त कराया है। सभी बच्चों की उम्र 8-14 साल के बीच की है। पुलिस ने सभी बच्चों को अभिरक्षा में ले लिया है। इस मामले में लेबर इंस्पेक्टर पिंकी टम्टा की तहरीर पर कैंटीन के मालिक के खिलाफ बाल मजदूरी कराने का मुकदमा दर्ज किया गया है। सभी बच्चे दूसरे राज्यों के रहने वाले हैं, जो वर्तमान में अपने माता-पिता के साथ ही क्षेत्र की झुग्गी झोपड़ियों में रहते हैं।
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी को शिकायत मिली थी कि सेलाकुई में शराब की कैंटीन में बच्चों से वेटर का काम कराया जा रहा है। सूचना पाकर ऊषा नेगी बुधवार को तहसीलदार प्रकाश शाह, एसओ नरेश राठौर और बचपन बचाओ आंदोलन संस्था के सदस्यों के साथ कैंटीन में छापेमारी की। जहां 8-14 साल के आठ बच्चे लोगों को शराब परोसते मिले। पूछताछ के बाद ऊषा नेगी ने सभी बच्चों को लेकर सहसपुर थाने पहुंचीं और लेबर इंस्पेक्टर पिंकी टम्टा ने शराब कैंटीन के मालिक के खिलाफ तहरीर दी है। एसओ नरेश राठौर ने बताया कि कैंटीन के मालिक के खिलाफ बाल मजदूरी कराने का मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बताया कि 14 साल से छोटे बच्चों से मजदूरी कराना गैर कानूनी है। उन्होंने बचपन बचाओ आंदोलन के सदस्यों के साथ मिलकर सभी बच्चों के पुनर्वास में मदद करने की बात कही है।
मदरसे के बच्चों को नहीं पता देश का नाम
सेलाकुई। बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बुधवार को बड़ा रामपुर स्थित मदरसा अज्जमुतल करम का भी निरीक्षण किया। मदरसे में करीब 80 छात्र रहते हैं। निरीक्षण के दौरान मदरसे में कई खामियां मिलीं। मदरसा बच्चों के रहने के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। जिस पर उन्होंने मदरसा प्रबंधन को फटकार लगाई। इस दौरान उन्होंने छात्रों से कई सवाल भी किए, लेकिन कोई भी बच्चा प्रश्नों का सही उत्तर नहीं दे सका। कई छात्रों को अपने देश का नाम तक नहीं पता था। ऊषा नेगी ने बताया कि मामले में रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।