राजधानी दून में अपने प्रेमी संग मिलकर पति की हत्या करने वाली महिला व उसके प्रेमी को कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई। सजा में हत्यारी पत्नी के पांच साल के बेटे की गवाही अहम रही।
मामला अक्टूबर 2007 का है। 19 अक्टूबर 2007 को क्लेमेंटटाउन क्षेत्र में स्थित ओबरी बट्टा गांव में कारपेंटर दीपक की रहस्यमय परिस्थितियों में घर में ही मौत हो गई थी। उसके मौत के समय घर में उसकी पत्नी बबीता और पांच साल का बेटा मौजूद था।
दोनों के बीच विवाद था
पत्नी ने पुलिस को बताया कि उसके पति की तबीयत खराब थी। जिस कारण उसकी मौत हुई। वहीं, कारपेंटर दीपक के दो परिचित रामजी लाल और रामपाल ने पुलिस को बयान दिए कि मौत के एक दिन पहले दीपक और उसकी पत्नी के बीच जबरदस्त विवाद हुआ था।
पुलिस ने शक के आधार पर पत्नी से पूछताछ की थी। लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसमे मौत की वजह गले की हड्डी का टूटना बताया गया।
कड़ाई से पूछताछ में बबीता ने पुलिस को बताया कि उसने अपने प्रेमी मंगलराम के साथ मिलकर दीपक की हत्या की है। मंगलराम क्लेमेंटटाउन स्थित एयरफोर्स में चतुर्थ श्रेणी कर्मी था।
पांच साल के बेटे का अहम बयान
पुलिस ने दोनों को कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें न्याययिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। सरकारी वकील जया ठाकुर ने बताया सजा दिलाने में मृतक के पांच साल के बेटे के बयान अहम रहे।
मासूम बच्चे ने अदालत में बयान दिए कि घटना वाले दिन उसकी मां ने पापा के पांव पकड़े हुए थे। जबकि अंकल पापा का गला दबा रहे थे। मंगलवार को अपर जिला जज पंकज तोमर की अदालत ने दोनों अभियुक्तों को दोषी पाया और अजीवन कारावास की सजा सुनाई।