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अमरमणि की सजा कम हुई तो प्राण त्याग दूंगी:निधि शुक्ला

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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने कहा है कि यदि अमरमणि त्रिपाठी की सजा कम की गई तो वह प्राण त्याग देंगी। उन्होंने कहा कि उनकी बहन की हत्या में उम्रकैद भुगत रहे उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी ने 15 दिन पहले उत्तराखंड के राज्यपाल से सजा माफी की अपील की थी। इसके विरोध में निधि ने भी राज्यपाल के पास याचिका दायर कर अमरमणि त्रिपाठी की अपील खारिज करने की मांग की है। इसके साथ ही निधि शुक्ला ने हरिद्वार जेल प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन की मिलीभगत से अमरमणि जेल में न होकर इलाज के नाम पर अपने गृह जनपद के एक मेडिकल कॉलेज में है। यह बातें निधि शुक्ला ने शनिवार को यहां प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहीं।
शनिवार को निधि शुक्ला, अमरमणि त्रिपाठी की बहू की मां सीमा सिंह के साथ देहरादून पहुंची थीं। उन्होंने कहा कि अमरमणि त्रिपाठी उनकी बहन की हत्या का दोषी होने के साथ ही ए ग्रेड का हिस्ट्रीशीटर भी है। उसके खिलाफ 33 आपराधिक मामले दर्ज हैं। बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में अमरमणि त्रिपाठी को जिला न्यायालय, देहरादून ने साल 2007 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद उच्च न्यायालय, नैनीताल और उच्चतम न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था।
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अब अमरमणि त्रिपाठी ने उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. केके पाल के पास दया याचिका दायर कर सजा माफ करने की गुहार लगाई है। निधि शुक्ला ने कहा कि अपनी बहन को इंसाफ दिलाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ गंवा दिया है। ऐसे में अगर अमरमणि की सजा में कमी की जाती है तो यह फैसला सुनाने वाले के ‘दरवाजे’ पर आमरण अनशन कर प्राण त्याग देंगी। निधि ने बताया कि अमरमणि की दया याचिका के खिलाफ उन्होंने भी उत्तराखंड के राज्यपाल के यहां याचिका दायर कर दी है।
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चार साल से गोरखपुर में क्यों है अमरमणि त्रिपाठी?
गौरतलब है कि अमरमणि त्रिपाठी चार साल पहले तक हरिद्वार जेल में बंद था। इसी दौरान उसने बीमारी का बहाना बनाया और गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो गया। पिछले चार वर्षों से वह मेडिकल कॉलेज में ही है। ऐसे में निधि शुक्ला ने हरिद्वार जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन की मिलीभगत के चलते ही अमरमणि गोरखपुर में है। उन्होंने आरोप लगाया कि वह मेडिकल कॉलेज से ही आपराधिक गतिविधियों का संचालन कर रहा है। उन्होंने पुलिस उपमहानिरीक्षक (जेल) से जल्द अमरमणि को हरिद्वार जेल लाने की अपील की है।
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यह है पूरा मामला
नौ मई 2003 को कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक और कैबिनेट मंत्री अमरमणि त्रिपाठी पर था। मधुमिता की बहन निधि शुक्ला की अपील पर केस उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड ट्रांसफर कर दिया गया। हत्याकांड के चार साल बाद 2007 में देहरादून सत्र एवं जिला न्यायालय ने अमरमणि को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद वर्ष 2007 में उच्च न्यायालय नैनीताल और 2013 में उच्चतम न्यायालय दिल्ली ने इस सजा को बरकरार रखा था। अमरमणि को फैसले के बाद हरिद्वार जिला कारागार में रखा गया था।
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पूरे मामले का संज्ञान ले लिया गया है। इस संबंध में जांच कराई जा रही है कि अमरमणि त्रिपाठी इतने लंबे समय से जेल से बाहर होकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में कैसे रह रहा है। जल्द ही उसे हरिद्वार जेल में लाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
-पीवीके प्रसाद, आईजी जेल
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