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अंदर के लिए-- शंकराचार्य

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कौशल सिखौला
हरिद्वार। जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर स्वामी हेमानंद गिरि के नेपाल में शंकराचार्य बनने से नया विवाद खड़ा हो गया है। हरिद्वार के संतों का मानना है कि एक महिला कभी शंकराचार्य नहीं बन सकती है। इससे पहले भी वर्ष 2010 में हरिद्वार कुंभ में महिला शंकराचार्य पद को लेकर हंगामा खड़ा हो गया था। स्वामी हेमानंद गिरी के शंकराचार्य बनने के बाद आने वाले दिनों में विवाद और बढ़ने के आसार दिख रहे हैं।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित मठाम्नाय के अनुसार, शंकराचार्य पद पर कोई महिला नहीं बैठ सकती। महिला प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सकती हैं, लेकिन शंकराचार्य नहीं। उन्होंने कहा कि जहां तक नेपाल का सवाल है, नेपाल में शंकराचार्य पीठ की स्थापना अमान्य है। नेपाल सरकार से इसका विरोध किया जाएगा। उनके अनुसार पशुपतिनाथपीठ का कोई औचित्य नहीं है।
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पहले भी हो चुका है विवाद
महिला शंकराचार्य पद को लेकर वर्ष 2010 के हरिद्वार कुंभ में उस समय हंगामा खड़ा हो गया था, जब मां योगशक्ति ने शंकराचार्य के समकक्ष महिला संतों के लिए पार्वत्याचार्य पद का सृजन कर डाला। उन्होंने उस समय अमेरिका में रह रही महामंडलेश्वर ज्योतिषानंद को पहली पार्वत्याचार्य बनाकर कनखल में पट्टाभिषेक समारोह का आयोजन किया था। समारोह का विरोध सभी अखाड़े कर रहे थे। समारोह के चलते सैकड़ों नागा संन्यासियों समारोह स्थल जाकर पंडाल उखाड़ फेंका और योगशक्ति, ज्योतिषानंद दोनों को खदेड़ दिया था।
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शंकराचार्य के रूप में कुंभ स्नान नहीं कर पाएंगी
यह ठीक है कि महामंडलेश्वर हेमानंद गिरि जूना अखाड़े के मंडलेश्वर हैं। उन्हें शंकराचार्य बनने का अधिकार नहीं। उन्होंने अपने पट्टाभिषेक में चादर देने के लिए किसी अखाड़े को भी नहीं बुलाया। नेपाल में शंकराचार्य पीठ की स्थापना नहीं की जा सकती। आने वाले कुंभ मेलों में हेमानंद तभी स्नान कर पाएंगी, जब वे महामंडलेश्वर के रूप में आएंगी। शंकराचार्य बनकर उन्हें अखाड़ों के साथ शाही स्नान नहीं कराया जा सकता। शंकराचार्य बनाने वाली विद्वत परिषद भी अवैध है।
-श्रीमहंत हरि गिरि, राष्ट्रीय महामंत्री अखाड़ा परिषद, संरक्षक जूना अखाड़ा





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