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गैंग रेपः अज्ञात अपराधियों की 'मित्र' बनी मित्र पुलिस

Sat, 28 Sep 2013 11:15 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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2008 में हुए गैंग रेप मामले में भाजपा के दो नेताओं को भले ही सजा मिल गई, लेकिन तीन अज्ञात पुलिस की गिरफ्त से अब भी बाहर हैं।
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इस संबंध में पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर वह मामले की जांच आगे बढ़ाएगी, जबकि कानून के जानकारों का कहना है कि जब केस पहले से दर्ज है तो फिर से शिकायत की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस पीड़िता से तीनों अज्ञात की शिनाख्त करवाकर कोर्ट में अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल कर सकती है।

दबाव में है पुलिस
पुलिस पर आरोप लग रहा है कि वह मामले में भाजपा के दो बड़े नेताओं और एक आईएएस का नाम सामने से दबाव में है। पूर्व में भी दबाव में ही जांच अधिकारी को बदला गया था। उसके बाद जांच आगे नहीं बढ़ाई गई और वर्ष 2008 से अब तक तीन अज्ञात लोग ज्ञात नहीं हो पाए हैं। विधि के जानकारों के अनुसार पुलिस प्रकरण में कंप्यूटर स्केच जारी करवा सकती है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता एमएस पंत कहते हैं कि पीड़िता ने एफआईआर में तीन अज्ञात व्यक्तियों पर बलात्कार का आरोप लगाया है। पुलिस प्रकरण की जांच कर देख सकती है कि किन लोगों ने मामले को प्रभावित किया।

अधिवक्ता सुयश कुकरेती कहते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में जांच के लिए कई नई टेक्नालाजी आई है। उसका उपयोग करके पुलिस आरोपियों को बेनकाब कर सकती है। कहा जा रहा है कि पुलिस ऐसा तभी कर सकती है जबकि वह इच्छा शक्ति दिखाए। माना जा रहा है कि पुलिस अब भी नेताओं के दबाव में है।

विवेचना तक नहीं हुई
सामूहिक बलात्कार मामले में तीन अज्ञात इतने कद्दावर थे कि उनकी गिरफ्तारी तो दूर पुलिस ने विवेचना तक नहीं की। यही कारण था कि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत में गैंगरेप की धारा हटाने के लिए कहा।

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अदालत में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि पीड़िता ने तीन अन्य लोगों द्वारा बलात्कार का आरोप लगाया है, लेकिन इन तीन अज्ञात को पुलिस न तो गिरफ्तार कर पाई है न ही विवेचना हुई। यहां तक की अभियोजन पक्ष भी तीनों अज्ञात के संबंध में न्यायालय में कोई सूचना प्रस्तुत नहीं कर पाया है।

ऐसे में गैंगरेप की धारा को हटाया जाए। वरिष्ठ वकील चंद्रशेखर तिवारी बताते हैं कि हाई प्रोफाइल मामला होने की वजह से पुलिस ने न ठीक से विवेचना की और न ही कोर्ट ने 319 में आरोपियों को तलब किया।
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अज्ञात यूं हो सकते हैं ज्ञात
वरिष्ठ अधिवक्ता केके गोयल बताते हैं कि यदि पुलिस मामले में ठीक से जांच नहीं कर रही है तो प्रकरण में हाईकोर्ट में रिट लगाई जा सकती है। इसके बाद हाईकोर्ट मामले में पुलिस को जांच के लिए आदेश दे सकता है।

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