ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत प्रमाणपत्र बनाने के लिए रिश्वत मांगने वाले लेखपाल को न्यायालय ने तीन साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। 11 साल पुराने इस मामले में विशेष न्यायाधीश सतर्कता आरके खुल्बे की अदालत ने दोषी पर अलग-अलग धाराओं में कुल 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने तत्कालीन ट्रैप करने वाली टीम को 10 हजार रुपये पुरस्कार देने की घोषणा की है।
अभियोजन के अनुसार तीन अगस्त 2007 को बसराज सिंह निवासी पुरोला बाजार ने विजिलेंस के पास शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार आठ मई 2007 को बसराज की पत्नी पार्वती का निधन हो गया था। बसराज गरीब परिवार से ताल्लुक रखता था तो उसने समाज कल्याण विभाग की राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत लाभ लेना चाहा। इसके लिए उसने विभाग से फार्म लिया और जरूरी कागजात लेकर मेहर गांव पुरोला के लेखपाल भगत सिंह रावत के पास पहुंचा। इस पर भगत सिंह ने बसराज से प्रमाणपत्र बनाने में दो हजार रुपये खर्च बताया। बसराज ने खुद के गरीब होने की बात कही और दो हजार रुपये देने में असमर्थता जताई। इस पर दोनों के बीच एक हजार रुपये पर बात बन गई। इसके बाद तीन अगस्त को भगत सिंह रावत ने बसराज को पुरोला बाजार में रिश्वत लेकर बुलाया। इसी बीच विजिलेंस ने भगत सिंह रावत को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में बुधवार को भगत सिंह रावत निवासी ग्राम किशना पोस्ट बड़कोट तहसील पुरोला उत्तरकाशी को भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा सात में व 13 में दोषी पाते हुए तीन-तीन साल की सजा सुनाई। दोनों धाराओं में पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया है।