सात और शिक्षकों के प्रमाण पत्र फर्जी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले सात और शिक्षक पकड़ में आए हैं। बृहस्पतिवार को सामने आए इन शिक्षकों में से छह ने बीटीसी के फर्जी प्रमाण पत्र और एक ने फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र नियुक्ति के समय जमा कराए थे। इनमें से दो प्रधानाध्यापक पद पर तैनात हैं। सातों के खिलाफ एसआईटी प्रभारी एसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे ने विभागीय और वैधानिक कार्रवाई की संस्तुति की है। इन शिक्षकों को मिलाकर अब तक कुल 55 शिक्षकों के नाम सामने आ चुके हैं।
एसआईटी की जांच में आया है कि जिन लोगों ने बीटीसी के फर्जी प्रमाण पत्र लगाए हैं वे सभी गलत हैं। सभी ने जो रोल नंबर दर्शाए हुए हैं वे रोल नंबर कभी जारी ही नहीं किए गए। जांच अधिकारियों ने इसकी तस्दीक उत्तर प्रदेश में विभागीय परीक्षाएं आयोजित कराने वाले विभाग से की है। वहां से रिपोर्ट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
इन्होंने लगाई बीटीसी के फर्जी प्रमाण पत्र
समरपाल सिंह, सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय पहसीनी सितारगंज, ऊधमसिंह नगर
बीटीसी वर्ष-1990
नियुक्ति वर्ष-1997
वृंदावन, सहायक अध्यापक विकास खंड खटीमा, ऊधमसिंह नगर
बीटीसी वर्ष-1987
नियुक्ति वर्ष-1992
आनंदस्वरूप, सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय शक्ति फार्म, सितारगंज, ऊधमसिंह नगर
बीटीसी वर्ष-1989
नियुक्ति वर्ष-1997
शूरवीर सिंह, प्रधानाध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय गुलड़िया बाजपुर, ऊधमसिंह नगर
बीटीसी वर्ष-1991
नियुक्ति वर्ष-1996
रामकुमार, प्राथमिक विद्यालय, खटीमा, ऊधमसिंह नगर
बीटीसी वर्ष-1987
नियुक्ति वर्ष-1992
कुमकुम भटनागर, प्रधानाध्यापिका प्राथमिक विद्यालय, बादशाहपुर बहादराबाद, हरिद्वार
बीटीसी वर्ष-1984
नियुक्ति वर्ष-1995
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इस अध्यापक ने लगाया फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र
खड़ंजा कुतुबपुर लक्सर, जिला हरिद्वार के प्राथमिक विद्यालय में तैनात शिक्षक सुशील कुमार ने नियुक्ति के समय फर्जी मूल निवास प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। सुशील कुमार ने खुद को मानकपुर आदमपुर भगवानपुर हरिद्वार का मूल निवासी बताया था। जबकि उनके इस मूल निवास प्रमाण पत्र को रुड़की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने खारिज भी कर दिया। उनका यह प्रमाण पत्र साल 2006 में जारी किया गया। इसके आधार पर उसने 2009 में नियुक्ति पाई थी। एसपी सीबीसीआईडी श्वेता चौबे ने बताया कि जांच टीम ने मानकपुर गांव में भी जाकर सत्यापन किया था, मगर वहां के निवासियों ने बताया कि यहां इस नाम का कोई व्यक्ति नहीं रहता है।
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11 महीने में पकड़ में आया बड़ा फर्जीवाड़ा
- एसआईटी की जांच में अब तक सामने आए 55 शिक्षकों के नाम
- 20 मामलों में हो चुके हैं मामले दर्ज, 60 से अधिक पहुंच सकता है आंकड़ा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। पिछले साल अमर उजाला के ‘फर्जी डिग्री, असली नौकरी’ अभियान के बाद से सीबीसीआईडी एसपी श्वेता चौबे के नेतृत्व में एसआईटी एक के बाद एक खुलासा कर रहीं हैं। एसआईटी ने अब तक 55 शिक्षकों का राज फाश कर दिया है। जांच के बाद इनमें से 20 के खिलाफ तो आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जा चुका है। जबकि पिछले दिनों शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने बाकी के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
पिछले साल मामले सामने आने के बाद सितंबर 2017 में सरकार की ओर से सीबीसीआईडी में एएसपी श्वेता चौबे के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया था। टीम शुरुआत में 2012 से 2017 तक नियुक्ति पाने वालों की जांच कर रही थी। इसके बाद जब मामला बड़ा होता गया तो सरकार के निर्देश पर दिसंबर 2017 में इसके लिए बाकायदा विज्ञप्ति जारी की गई कि कोई भी अपने स्तर से इस तरह की शिकायत कर सकता है।
इसके बाद एसआईटी के पास शिकायतों का अंबार लग गया। अब तक ऐसे 55 मामले सामने आ चुके हैं और वर्तमान में 50 से अधिक शिकायत एसआईटी के पास हैं, जिनमें जांच चल रही है। एसआईटी ने इस अभियान के तहत उत्तराखंड की दोनों बड़ी यूनिवर्सिटियों से लेकर उत्तर प्रदेश के विख्यात विवि और संस्थानों में पत्राचार और भौतिक सत्यापन के आधार पर ये खुलासे किए हैं। इनमें कई गठजोड़ भी सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें हरिद्वार और गोरखपुर यूनिवर्सिटी के ताल्लुकात की पड़ताल की जा रही है। इसी गठजोड़ के चलते पिछले दिनों हरिद्वार निवासी कई लोगों का नाम सामने आए थे। पूरी जांच के बारे में एएसपी श्वेता चौबे बताती हैं कि हर शिकायत की गंभीरता से जांच की जा रही है। इसके लिए वे विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों की जांच पर भी नजर रख रहीं हैं। संभावना है कि इन 55 मामलों के बाद कई और नाम भी सामने आ सकते हैं। पिछले दिनों शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने भी बाकी मामलों में भी तत्काल मुकदमे दर्ज करने को कहा गया था।