जंगल में लगी आग की चपेट में आकर 30 बकरियां और भेड़ें झुलसकर मर गईं। पशुपालक ने बकरियों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन आग के तेजी से फैलने से पशुपालक को भागकर जान बचानी पड़ी।
बाणाधार निवासी हरिदत्त शुक्रवार को बकरियों और भेड़ों को चराने बडियार खेडा और मशना छानी के बीच स्थित जंगल में लेकर गया था। पशुपालक जंगल में लगी आग को नहीं देख पाया और आग के करीब पहुंच गया। इससे उसकी बकरियां और भेड़ें आग में घिर गई।
पशुपालक ने बकरियों को निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक आग ने भीषण रूप ले लिया। पशुपालक को भागकर अपनी जान बचानी पड़ी। पशुपालक ने बताया कि उसने कुछ बकरियों और भेड़ों को तो बचा लिया, लेकिन आग में 24 बकरियां और छह भेड़ें झुलसकर मर गईं। बताया कि भेड़ और बकरियों के जलने से उसके सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
एसडीएम डॉ. अपूर्वा सिंह ने बताया कि मामले की संबंधित तहसीलदार से जानकारी लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं, डीएफओ चकराता दीपचंद आर्य ने कहा कि प्रकरण सिविल स्वयं वन क्षेत्र का है। आगजनी की घटनाएं आपदा के तहत आतीं हैं। वन विभाग की ओर से क्षतिपूर्ति नहीं दी जा सकती।