ब्यूरो/विकासनगर।
ढालीपुर स्थित आम के बाग में अवैध पातन के बाद मौके से मिली लकड़ियों को अब तक कब्जे में नहीं लिया जा सका है। न ही संबंधित विभागों ने ठूठों की पहचान के लिए उन पर कोई निशान लगाया है। जिससे दोनों विभागों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। मामले में जिम्मेदार महकमे अब भी कार्रवाई के लिए एक-दूसरे पर पल्ला झाड़ रहे है। जिससे भू-माफिया के हौसले बुलंद है।
मालूम हो कि माफिया ने एआरटीओ कार्यालय के सामने स्थित आम के बाग पर 25 से अधिक पेड़ों का सफाया कर दिया था। पेड़ों के कटान का पता न चले इसके लिए ठूंठ को मिट्टी से दबाने की कोशिश की गई थी। अवैध पातन की गई लकड़ी को पास ही स्थित झाड़ियों में छिपा दिया गया। मौके पर पहुंचे वन और उद्यान विभाग की टीम की जांच में भी अवैध पातन की पुष्टि हुई थी। लेकिन अब तक दोनों विभागों की ओर से मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है।
कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग के डीएफओ सुरेंद्र कुमार का कहना है कि विभाग के स्तर से निकासी नहीं दी गई है। लकड़ी चोरी हुई है, ऐसे में कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस और उद्यान विभाग की है। इसके लिए बाकायदा जीओ तक जारी हुआ है। उद्यान विभाग के एसडीओ इंदु भूषण कमोला ने कहा कि अवैध पातन मामले में विभाग के पास कार्रवाई के अधिकार नहीं है। कार्रवाई के लिए वन विभाग और तहसील प्रशासन जिम्मेदार है। एसडीएम जितेंद्र कुमार ने कहा कि होली के बाद मैं स्वयं बाग का निरीक्षण करूंगा। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। मामले में दोनों विभागों के उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा।