अदालत ने स्कूल के गोवा टूर के दौरान समुद्र में डूबने से हुई दो स्कूली बच्चों की मौत के मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन शिक्षकों को दो-दो साल का कारावास और 60 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साक्ष्यों के अभाव में प्रधानाचार्य समेत दो को बरी कर दिया गया है।
गाजियाबाद निवासी राजपाल सिंह ने 16 नवंबर 2006 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसका बेटा निखिल राजपुर रोड स्थित स्कॉलर होम में पढ़ता था। अक्तूबर-2005 में स्कूल के बच्चाें को गोवा भ्रमण ले जाना प्रस्तावित था। टूर जाने से पहले वह अपने बेटे को लेने आए थे, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने बेटे को साथ भेजने से मना कर दिया था। गोवा में टूर के दौरान उसके बेटे निखिल और एक अन्य छात्र निशांत की समुद्र में डूबने से मौत हो गई थी। उस समय दो स्कू ली बच्चाें की मौत को लेकर काफी हंगामा हुआ था।
इस पर पुलिस ने धारा 304 (ए) के तहत मुकदमा दर्ज कर पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। इस मामले की सुनवाई अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंचम पुनीत कुमार की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की तरफ से पैरोकारी करते हुए छह गवाह प्रस्तुत किए गए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद बच्चों की देखभाल में उपेक्षा बरतने के आरोप में शिक्षक अरुण कुमार, छवि रानी और सुशांत पांडा को दो-दो साल के कारावास और 60 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि साक्ष्य के अभाव में प्रबंधन से जुड़े अरुण खन्ना और प्रधानाचार्य छाया खन्ना को बरी कर दिया गया है।