ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। जोशीमठ की किशोरी का उत्पीड़न करने के आरोप में चमोली (जोशीमठ) पुलिस ने ही मुकदमा दर्ज कर लिया है। शून्य में दर्ज एफआईआर को देहरादून ट्रांसफर किया जाएगा। इससे पहले बाल आयोग की शिकायत पर पुलिस ने जांच तो की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं की थी। इस पर पुलिस मुख्यालय ने चमोली पुलिस से जवाब तलब कर दून पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। इससे पहले कि दून पुलिस जांच पूरी कर मुकदमा करती, जोशीमठ पुलिस ने मुख्यालय की फटकार के बाद शून्य में एफआईआर दर्ज कर ली।
गौरतलब है कि जोशीमठ की 15 वर्षीय किशोरी और उसके पिता ने बाल आयोग से केवि ओएनजीसी की प्रधानाचार्य अंशुम शर्मा के खिलाफ उत्पीड़न की शिकायत बाल आयोग से की थी। आरोप है कि अंशुम, किशोरी को पालन पोषण के लिए जोशीमठ से लाईं थी, मगर उसे यहां महीनों तक पीटा और उस पर कई लांछन भी लगाए। चूंकि, अगस्त 2017 से किशोरी जोशीमठ में अपने परिवार के साथ रह रही है तो आयोग ने चमोली पुलिस को कार्रवाई के आदेश दिए थे। इस पर जोशीमठ पुलिस ने किशोरी के बयान दर्ज किए। जिसमें उत्पीड़न की पुष्टि हुई। बावजूद इसके एफआईआर दर्ज नहीं की। जबकि, नियमानुसार किशोरी की शिकायत पर वहीं पर शून्य में एफआईआर दर्ज कर लेनी थी। उन्होंने किशोरी और उसके परिजनों को यह कहते लौटा दिया कि घटनास्थल देहरादून का है, लिहाजा दून पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी। इससे नाराज आयोग ने मंगलवार को पुलिस मुख्यालय में महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार को शिकायत की थी। इस पर उन्होंने चमोली पुलिस से इसके लिए जवाब तलब किया और दून पुलिस को मुकदमे दर्ज करने के आदेश दिए।
बृहस्पतिवार को एसएसपी निवेदिता कुकरेती के आदेश पर पुलिस ने बाल आयोग से शिकायत से संबंधित दस्तावेज हासिल किए। बताया जा रहा था कि यहां प्राथमिक जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा। शुक्रवार को जोशीमठ पुलिस ने ही अंशुम शर्मा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा-374 (बल पूर्वक श्रम कराना) और किशोर न्याय अधिनियम की धारा-75 के तहत शून्य में एफआईआर दर्ज की। इधर, इस मामले में देहरादून एसएसपी निवेदिता कुकरेती का कहना है कि उन्हें जानकारी मिल गई है। जोशीमठ से यह मुकदमा डालनवाला थाना (देहरादून) में दर्ज किया जाएगा। महिला का घर हाथी बड़कला क्षेत्र में है।