देश को मिलेंगे भारतीय वन सेवा के 94 अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
16 महीने के बाद देश को भारतीय वन सेवा के 94 अफसर और मिल जाएंगे। इनमें आठ महिला अधिकारी होंगी। दो परिवीक्षार्थी भूटान के हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी में भारतीय वन सेवा (परिवीक्षार्थी) के 2017-19 के पाठ्यक्रम का शुभारंभ हो गया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने परिवीक्षार्थियों को बताया कि वन विभाग का दायरा जंगलों से बढ़कर भूक्षेत्र तक हो गया है। सामान्य मोड से बाहर निकलकर चुनौतियों का सामना करें। खूब पढ़ें और पूर्वजों से सीखें।
सत्र उद्घाटन का कार्यक्रम अकादमी के हरि सिंह सभागार में किया गया। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि फॉरेस्ट्री एक कठिन व्यावसाय है। सत्य, प्रेम और दूसरों के प्रति संवेदना की शक्ति के साथ नए विचारों को आगे लाएं। पीएम नरेंद्र मोदी को युवाओं पर बहुत भरोसा है। इस वक्त जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वायु प्रदूषण सरीखी चुनौतियां हैं। बड़ी जनसंख्या वनों पर आश्रित है। ग्रामीण समुदायों की अनुकूलन क्षमता में वृद्धि के उपाय करें।
इस मौके पर महानिदेशक वन एवं पर्यावरण सिद्धांत दास ने वर्ष 1960 से अब तक वन विभाग में बदलाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वन प्रबंधन का उद्देश्य टिंबर से हटकर कार्बन एकत्रीकरण हो गया है। 21वीं सदी में पर्यावरण विश्व समस्या का मुख्य बिंदु हो गया। वनों पर जनसंख्या का दबाव बढ़ रहा है। इस मौके पर अकादमी के निदेशक डॉ. शशि कुमार ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने वन स्मारक स्थल पर कीर्तिचक्र पी. श्रीनिवाल और संजय सिंह तथा अन्य शहीदों को याद किया। इसके बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल व्यायामशाला का उद्घाटन किया।
वन परियोजनाओं का लाभ आमजन को मिले
देहरादून। केंद्र वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने शनिवार को भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् (आईसीएफआरई) और वन अनुसंधान संस्थान में चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि अनुसंधान कार्य समाज की आवश्यकतानुसार किए जाएं। शोध कार्य गुणवत्ता उत्पाद के रूप में आम आदमी तक पहुंचे साथ ही इनका कोई दुष्प्रभाव भी न हो। उन्होंने कहा कि कार्य ऐसे हों जिससे हरित क्षेत्र बढ़े तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या का समाधान हो सके। कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से आजीविका के विकल्प पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। निदेशक डॉ. सविता ने अनुसंधान तथा अन्य गतिविधियों पर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मौके पर डीजी सिद्धांतदास तथा विज्ञानी मौजूद रहे।