कश्मीर के कुलगाम में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए मैखोली निवासी रघुवीर सिंह का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
रामगंगा नदी के मैगड़ घाट पर सैन्य अधिकारियों और विधानसभा के उपाध्यक्ष डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी ने शहीद के शव पर पुष्पचक्र अर्पित किए। छह कुमाऊं रेजीमेंट के 12 और एक नागा रेजीमेंट के 6 जवानों ने उन्हें अंतिम सलामी दी।
सेना से सेवानिवृत्त मैखोली निवासी आनंद सिंह का बड़ा बेटा रघुवीर 12 साल पहले सेना में भर्ती हुआ था और इन दिनों आरआर राइफल में कश्मीर के कुलगाम क्षेत्र में तैनात था। 11 फरवरी को हुई मुठभेड़ में रघुवीर शहीद हो गए थे। उनका पार्थिव शरीर सोमवार को वायु सेना के हेलीकॉप्टर से गौचर और देर शाम सात बजे मैखोली गांव पहुंचा।
मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे गांव में शहीद की शव यात्रा एक किमी दूर रामगंगा नदी के तट पर मैगड़ घाट पहुंची। यहां सैन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने शव पर पुष्प चक्र अर्पित किए। इसके बाद सैनिकों ने शहीद रघुवीर को अंतिम सलामी दी। शहीद रघुवीर के भाई लक्ष्मण ने चिता को मुखाग्नि दी।
अंत्येष्टि में एक नागा रेजीमेंट के सूबेदार मेजर पृथ्वीपाल सिंह, कुमाऊं रेजीमेंट के मेजर आरपी सिंह, विधानसभा के उपाध्यक्ष डा. अनसूया प्रसाद मैखुरी, सुरेश कुमार बिष्ट, एसडीएम स्मृता परमार, प्रमुख सुमति बिष्ट, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, पूर्व प्रमुख सुरेंद्र सिंह नेगी, अवतार सिंह नेगी, नगर पंचायत अध्यक्ष गंगा सिंह पंवार सहित सैकड़ों संख्या में लोग शामिल हुए।
पापा से बोलूंगा, मम्मी दादी रो रही थी...
मैखोली गांव के शहीद रघुवीर सिंह की मौत से गांवों के लोग सदमे में हैं। पिता आनंद सिंह खामोश हैं तो रघुवीर की पत्नी रेखा और मां खिमुली देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। इस सबसे अंजान शहीद रघुवीर के छह वर्षीय बेटे देवेश को नहीं पता कि अब उसके पिता कभी नहीं आएंगे। अपनी मां और दादी को रोते हुए देखकर देवेश कहता है कि आप दोनों मत रो नहीं तो पापा से बोलूंगा कि मम्मी और दादी रो रही थी। उसकी यह बातें सुन मौके पर मौजूद सभी लोग रो पड़े।