गोवंश तस्करी के मामले में फरार आरोपी को मुनिकीरेती पुलिस ने हरिद्वार से बीती देर रात पकड़ लिया। तीन दिन पहले गूलर क्षेत्र से तस्करी के लिए जे जा रहे 14 बैल पकड़े गए थे।
गुलदार की खाल के साथ दबोचा तस्कर
स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और वन विभाग की टीम ने संयुक्त कार्रवाई में वन्य जीव तस्करी का भंडाफोड़ करते हुए ऋषिकेश से गुलदार की खाल के साथ एक तस्कर को दबोचा है। खाल की सप्लाई तीर्थनगरी में किसी नेपाली युवक को करनी थी। आरोपी के खिलाफ संबंधित धारा में केस दर्ज कर किया गया है।
वन्य जीव तस्कर की धरपकड़ के लिए गठित एसटीएफ और ऋषिकेश वन रेंज की टीम ने सोमवार सुबह करीब नौ बजे दून मार्ग स्थित नटराज चौक से एक संदिग्ध को धर दबोचा। तलाशी में उसके पास मिले एक बैग में गुलदार की खाल बरामद हुई।
टीम तस्कर को कोतवाली ले आई। तस्कर की पहचान टिकेंद्र सिंह उर्फ टीका पुत्र जगत सिंह निवासी ग्राम च्यौंढा मेहर, मायापुर, जिला चमोली के रूप में हुई है। कड़ी पूछताछ में उसने गुलदार की खाल की तस्करी करने का जुर्म कबूला। एसटीएफ उपनिरीक्षक संतोष शाह ने बताया कि हत्थे चढ़ा तस्कर पिछले दो दिन से तीर्थनगरी में रुका था।
सोमवार को खाल किसी नेपाली युवक को देनी थी। तस्कर ने सौदा करीब आठ लाख रुपये में तय होने की बात कबूली है। आरोपी के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 यथा संशोधित 2006 के अंतर्गत धारा 3, 39, 44, 50, 51 अनुसूची एक के तहत केस दर्ज हुआ है। टीम में एसटीएफ उपनिरीक्षक तुषार बोहरा, कांस्टेबल वेदप्रकाश भट्ट, विजेंद्र सिंह, वन दरोगा सुनील रावत, मंसाराम गौड़, राज बहादुर शामिल थे।
फंदा लगाकर करते हैं शिकार
गुलदार की खाल के साथ पकड़े गए तस्कर ने बताया कि सीमांत जनपद चमोली के जंगल में फंदा लगाकर वन्य जीव का अवैध शिकार करते हैं। वन्य जीवों के अंगों की तस्करी नेपाल और तिब्बत में की जाती है। तस्कर टिकेंद्र सिंह ने बताया कि जोशीमठ के हरीश सिंह से उसने सवा दो लाख में गुलदार की खाल खरीदी थी। आगे उसका सौदा आठ लाख रुपये में करना था। इससे पहले वह पकड़ा गया।