गाय के दूध की पौष्टिकता और गुणवत्ता का कोई मुकाबला नहीं है। गो-मूत्र से तमाम तरह के उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। भगवान के प्रसाद के चरणामृत में भी गो के दूध का इस्तेमाल होता है लेकिन आज तक गाय को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में महिलाएं गो माता को पालकर अपना जीवन यापन करती हैं। वर्तमान सरकार द्वारा महिलाओं को गो पालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने का अनुरोध किया जाएगा। वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने कहा कि हम सब गाय को गो माता मानते हैं। लेकिन सरकार गाय को राष्ट्र माता घोषित कर क्या संदेश देना चाहती है। सरकार ने गो माता की रक्षा के लिए अब तक क्या किया।
विधायक प्रीतम सिंह ने कहा कि प्रदेश में गो संरक्षण के लिए कानून है। लेकिन यह कानून दिखाई नहीं दे रहा है। विधायक देशराज कर्णवाल, संजय गुप्ता, विनोद चमोली ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।