महाकुंभ मेले में श्रद्धालुओं की कोविड निगेटिव जांच रिपोर्ट के कथित घोटाले के समय को लेकर चर्चा के बीच यह सामने आया है कि आरोपी मैक्स कॉरपोरेट सर्विस को कोविड जांच की अनुमति 26 मार्च को दी गई थी। जबकि, फर्म की ओर से उसके पार्टनर ने 11 जनवरी को इसके लिए आवेदन किया था। कुंभ मेला की अवधि एक से 30 अप्रैल तक रही। मैक्स कॉरपोरेट सर्विस ने 11 जनवरी को कुंभ मेलाधिकारी के कार्यालय में कोविड जांच के लिए आवेदन किया था।
कुंभ में कोविड जांच फर्जीवाड़ा: मैक्स कॉरपोरेट के बाद अब लाल चंदानी लैब भी पहुंची हाईकोर्ट
आवेदन पत्र में फर्म के पार्टनर की तरफ से कई आवश्यक जानकारियां दी गई थीं। आवेदन पत्र के अनुसार उनकी अपनी लैब है। साथ ही कई अन्य जांच लैब से भी अनुबंध है। फर्म ने खुद को कोरोना जांच करने में पूरी तरह से सक्षम बताया था। इसके बाद 26 मार्च 2021 को मैक्स काॅरपोरेट सर्विस को कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की कोविड जांच की अनुमति दी गई थी।
बता दें कि कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद राजनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा शुरू हो गई थी कि यह मामला किस मुख्यमंत्री के कार्यकाल का है। मामले को लेकर कांग्रेस भी हमलावर है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लगातार इस मामले को सोशल मीडिया के माध्यम से उठा रहे हैं।
दिल्ली समेत कई राज्यों का किया था जिक्र
फर्म ने अपने पत्र में जिक्र किया था कि दिल्ली, हरियाणा, जम्मू एंड कश्मीर समेत कई राज्यों में उनके कर्मचारी कोरोना की जांच की एंटीजन और आरटीपीसीआर जांच कर रहे हैं।
33 लेबोरेट्री का किया था दावा
फर्म ने पत्र में अपनी 33 जांच लैबोरेटरी होने का भी दावा किया था। इसके साथ ही कहा था कि वह आईसीएमआर के नियमों के अनुसार ही जांच करते हैं। उनकी लैबोरेटरी में बेहतर जांचकर्ता हैं।
‘प्रदेश सरकार के साथ हैं जुड़े’
फर्म के पत्र में लिखा था कि वह उत्तराखंड सरकार के साथ भी जुड़े हुए हैं। वर्ष 2020 में अगस्त में कोरोना काल के दौरान सरकार ने उन्हें प्रदेश में कोरोना जांच के लिए अनुमति भी दी थी। कुंभ मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की जांच के लिए वह पूरी तरह से सक्षम हैं।