मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम के अधिकार क्षेत्र का बताकर मामला स्थानांतरित कर दिया था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिंकी साहनी की अदालत ने मामले में याचिकाकर्ता और विपक्ष के अधिवक्ताओं को कई तिथियों में सुना और शनिवार को निर्णय सुनाया।
मंगलवार को मिले न्यायालय के आदेश के अनुसार जुगरान की याचिका को खारिज कर दिया गया है। न्यायालय ने कहा है कि इस मामले से संबंधित याचिका को एक बार उच्च न्यायालय और एक बार उच्चतम न्यायालय भी खारिज कर चुका है।
लिहाजा इस याचिका पर मुकदमे के आदेश पारित करना न्यायोचित नहीं है। इस तरह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के अंतर्गत इस प्रार्थनापत्र को खारिज किया जाता है। वहीं इस मामले में रविंद्र जुगरान का कहना है कि वे न्यायालय के इस आदेश के विरोध में ऊपरी अदालत में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे।