प्रभारी जज (रिमांड) रिंकी साहनी ने शनिवार को विजिलेंस टीम की ओर से ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए काशीपुर सरकारी अस्पताल के सीएमएस डॉ. भुवन चंद्र जोशी की रिमांड खारिज कर दी है।
इसके बाद सीएमएस पुलिस अभिरक्षा से मुक्त हुए। हालांकि, मामले में जांच जारी रहेगी। वहीं काशीपुर के सीएमएस पर हुई विजिलेंस कार्रवाई के विरोध में देहरादून में डॉक्टरों ने शनिवार को काली पट्टी बांधकर काम किया।
शनिवार को विजिलेंस के निरीक्षक डीआर आर्या अन्य कर्मियों के सहयोग से सीएमएस डॉ. जोशी को लेकर न्यायालय पहुंचे। अपर सिविल जज तथा प्रभारी जज (रिमांड) रिंकी साहनी ने विजिलेंस टीम से कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुरूप 1 से 7 वर्ष की सजा संबंधी अपराधों में सुनवाई के दौरान कारण स्पष्ट करने का उल्लेख है।
हिरासत का कारण न बता पाने पर कोर्ट नाराज
यही नहीं सीआरपीसी की धारा 41 में भी विवेचना के दौरान अपराधी के भाग जाने से जांच को खतरा होने के संबंध में उल्लेख करने का नियम है। ऐसे में विजिलेंस के अधिकारी जज को उत्तर नहीं दे सके, जिस पर उन्होंने नाराजगी भी व्यक्त की।
बचाव पक्ष की ओर से बहादुर सिंह पाल, कैलाश जोशी, अनिल रजवार ने भी सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग एवं सीआरपीसी का हवाला देते हुए रिमांड का विरोध किया। अभियोजन पक्ष की ओर से संयुक्त निदेशक अभियोजन एस पांडे ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद प्रभारी जज (रिमांड) रिंकी साहनी ने रिमांड खारिज कर दी।
यह है मामला
विजिलेंस टीम ने शुक्रवार को काशीपुर सरकारी अस्पताल के सीएमएस डॉ. जोशी को ड्यूटी के समय निजी प्रैक्टिस करते हिरासत में लिया था। डॉक्टर से मरीज से बतौर फीस लिए गए 350 रुपए भी बरामद किए गए थे। इसके अलावा, डॉक्टर के आवास की तलाशी लेने पर टीम ने 6,99,711 रुपए नगद, लाकर में 18 तोला सोना और परिजनों के 17 खातों में 22 लाख रुपया जमा पाया। जांच में कुल 50 लाख रुपए की संपत्ति मिली थी।