हाईकोर्ट ने 48 दिन से हड़ताल पर चल रहे मिनिस्ट्रीयल कर्मचारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को आदेश दिया है कि वह एस्मा (एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट) की कार्रवाई करे।
कोर्ट ने यह भी कहा कि जिस अवधि में कर्मियों ने कार्य नहीं किया है, उस अवधि के वेतन का भुगतान न किया जाए। वेतन भुगतान भी तभी करें जब हड़ताल वापस हो जाए। यदि कर्मचारी ऐसा नहीं करते हैं तो कार्य को सुचारु चलाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
न्यायालय ने फेडरेशन ऑफ मिनिस्ट्रीयल सर्विस उत्तराखंड को भी नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तिथि नियत की है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नैनीताल निवासी आनंद सिंह मेर और अधिवक्ता महेश चंद्र पंत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि लगभग 40 दिन से वेतन की डिमांड को लेकर पूरे प्रदेश के मिनिस्ट्रीयल कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके चलते आम जनता और छात्रों को अत्यधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।