आसन कंजरवेशन रिजर्व में बसा परिंदों का संसार इन दिनों बाहर से आने वाले पर्यटकों को खासा रास आ रहा है। रोजाना बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आने वाले सैलानी इन परिदों के दीदार के लिए आसन कंजरवेशन रिजर्व में पहुंच रहे हैं। ऐसे में इस बार वन विभाग नए साल के अवसर इन परिदों की गणना की योजना बना रहा है। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की माने तो जनवरी के दूसरे पखवाड़े में वन विभाग इन परिदों की गणना कर सकता है।
मालूम हो कि हर साल अक्तूबर में बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी इन परिदों के दीदार के लिए आसन कंजरवेशन रिजर्व में पहुंचते हैं। इन परिंदों में सबसे बड़ी संख्या साइबेरिया, अफगानिस्तान, तजाकिस्तान आदि क्षेत्रों से आने वाले परिंदों की होती है। हर साल दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में वन विभाग इन परिंदों की गणना करता है। लेकिन इस बार वन महकमे ने नए साल के मौके पर इन परिदों की गणना कराने का निर्णय लिया है। इस साल दिसंबर माह में जिस तरह से ठंड पड़ रही है। उसे देख वन महकमे को लग रहा है इस बार परिंदो की यह संख्या 6 हजार के आंकड़ें को पार कर जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस साल परिदों की संख्या पिछले सालों की तुलना में खासा बढ़ सकती है। प्रभारी वन बीट अधिकारी और पक्षी विशेषज्ञ प्रदीप सक्सेना ने बताया कि जनवरी दूसरे सप्ताह में इस बार परिंदों की गणना की जाएगी। इस बार आसन झील के संसार में कई पक्षियों ने चार से पांच साल के लंबे इंतजार के बाद दस्तक दी है।
इन प्रजाति के पक्षी पहुंचते हैं प्रवास पर
अब तक बीस से अधिक प्रजाति के विदेशी परिंदे आसन झील में प्रवास पर पहुंच चुके हैं। इन परिदों में रुडिक शेल्डक(सुरर्खाव) गैडवाल, टफटेड, कॉमनकूट, नार्दन सावलर, लिटिल ग्रिव, कॉरमोरेट, लिटिल कॉर्मोरेट, ग्रिड कॉर्मोरेट, वार हेडेक गीज, ग्रे लैक गीज, कॉमन पोचार्ड, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, कॉमन टील, ईग्रेट, ग्रेट ई ग्रेट, मलार्ड, पर्पल हेरोन, ग्रेहेरौन,रेड नेस्ड, आईबीज, ब्राउन हेडेड प्लासी व सी बर्ड का जोड़ा प्रमुख है।