पर्यावरणीय कारणों और परियोजना के तहत प्रस्तावित कार्यों में विभिन्न अड़चनों के चलते चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना को पूरा होने में अभी एक साल से अधिक का समय लग सकता है। देरी होने से परियोजना की लागत में एक हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है।
सर्वोच्च न्यायालय की राहत के बावजूद परियोजना का कार्य तय समय सीमा तक 50 फीसदी ही पूरा हो पाएगा। न्यायालय ने योजना के तहत उन्हीं कार्यों को ही मंजूरी दी है, जिन पर कार्य गतिमान है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय को न्यायालय में सात हफ्ते में प्रति शपथ पत्र दाखिल करना है। प्रति शपथ पत्र दाखिल होने के बाद सब कुछ न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तब तक लोकसभा चुनाव आ जाएंगे और इसकी व्यस्तता के चलते फिर परियोजना के शेष कार्यों पर मई और जून माह तक निर्णय होंगे। इसके बाद मानसून में कार्य नहीं हो पाएंगे। उनका कहना है कि परियोजना में यदि एक साल की देरी होती है तो कम से कम इसकी 10 फीसदी लागत बढ़ जाएगी। ये पूरी परियोजना 11700 करोड़ रुपये की है।
पांच बाईपास विवाद भी बड़ी अड़चन
चारधाम ऑलवेदर रोड के जिन कार्यों को सारी स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं, उन पर भी विभिन्न कारणों से कार्य आरंभ नहीं हो पा रहा है। इनमें पांच बाईपास हैं। जोशीमठ और ऋषिकेश में प्रस्तावित बाईपास को लेकर ज्यादा बड़ा विवाद है। जोशीमठ में स्थानीय लोग बाईपास निर्माण का विरोध कर रहे हैं। ऋषिकेश में बाईपास निर्माण के लिए भूमि प्रतिकर की लागत 240 करोड़ रुपये आ रही है, जिसे देने में मंत्रालय हिचक रहा है। चंपावत, लोहाघाट और पिथौरागढ़ बाईपास निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर दिक्कतें हैं।
चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना के संबंध में सर्वोच्च अदालत ने जो निर्देश दिए हैं, उनके अनुसार कार्य चल रहा है। तय लक्ष्य के हिसाब से 50 फीसदी परियोजना पर कार्य चल रहा है।
-ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, लोनिवि