फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देहरादून MDDA में ऐसे चलता है सिफारिशों का खेल

Fri, 05 Feb 2016 01:10 PM IST
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
देहरादून एमडीडीए में सुपरवाइजर बनने के लिए कर्मचारियों में सबसे ज्यादा मारामारी है। कमाई का मौका और फील्ड में रुतबा हासिल करने के लिए ज्यादातर कर्मचारी सुपरवाइजर की नौकरी करना चाहते हैं। इसके लिए हर स्तर से सिफारिश करवाई जाती है। प्राधिकरण में बिना सिफारिश के सुपरवाइजर बनना आसान नहीं है। वहीं एमडीडीए ने ज्यादातर कर्मचारियों को नियमों को ताक पर रखकर सुपरवाइजर बनाया है।
विज्ञापन


एमडीडीए में सुपरवाइजर पद स्वीकृत नहीं है। व्यवस्था बनाने के लिए एमडीडीए के गठन के शुरूआती दिनों में कुछ बाबुओं को समन तामील करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। यही बाबू एमडीडीए के समनों को तामील कराते और फील्ड की जानकारी विभागीय अधिकारियों को देते। धीरे-धीरे वह बाबूगिरी छोड़कर फुलटाइम यही काम करने लगे।

धीरे-धीरे यह पूरी तरह फील्ड में उतरकर निर्माण कार्यों पर नजर रखने और उसकी रिपोर्ट जेई और एई को देने लगे। अधिकारियों को भी उनके होने से सहूलियत होती, इसलिए वह भी उन्हें बढ़ावा देने लगे। तब से यह व्यवस्था लगातार चली आ रही है। नियमानुसार फील्ड में कार्यरत सुपरवाइजर को आईटीआई पास होने के साथ ही संबंधित क्षेत्र का तकनीकी ज्ञान भी होना चाहिए।
विज्ञापन


एमडीडीए में ज्यादातर सुपरवाइजर इन मानकों पर खरे नहीं उतरते। फिर भी अधिकारियों की कृपा और सिफारिश के दम पर वह लंबे समय से इन पदों पर कब्जा जमाए बैठे हुए हैं। आलम यह है कि ज्यादातर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से सुपरवाइजर का काम लिया जा रहा है।

अजय जैसे कई और भी हैं
एक लाख की घूस लेते पकड़े गए अजय कुमार जैसे प्राधिकरण में कई अन्य सुपरवाइजर भी हैं। हालांकि ऐसे मामलों में कई विभागीय अधिकारियों और आर्केटेक्ट की भूमिका भी सवालों के घेरे में हैं। ऐसे कई मामलों की शिकायत पहले भी आई हालांकि आपसी मिलीभगत कर उन्हें दबा दिया गया। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पूर्व भी ऐसे ही मामलों में शिकायत मिलने के बाद कुछ सुपरवाइजरों को हटाया गया था।

प्राधिकरण में सुपरवाइजर पिछले लंबे समय से कार्य कर रहे हैं। विभागीय व्यवस्था के तहत ही इनको काम सौंपा गया होगा। इस मामले में किसी तरह की गड़बड़ी ना हो, यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- प्रकाश चंद्र दुमका, सचिव एमडीडीए

एई की तलाश में छापेमारी, लाखों की मिली एफडी
मानचित्र वाद फाइनल करने के नाम पर एमडीडीए के सुपरवाइजर अजय कुमार के बाद विजिलेंस को सहायक अभियंता की तलाश है। आवास की तलाशी में लाखों रुपये की एफडी और दूसरे कागजात मिले है। सुपरवाइजर अपने एई के इशारे पर ही रिश्वत लेने गया था।

विजिलेंस टीम ने माजरा निवासी लक्ष्मीचंद की शिकायत पर एमडीडीए के सहायक अभियंता अजय कुमार को एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। जांच में पता चला था कि रिश्वत की डील एमडीडीए के सहायक अभियंता टीपी नौटियाल से हुई थी। पहले टीम ने अजय कुमार के आवास की तलाशी ली थी, जहां से करीब सात लाख की नगदी और बैंक खातों की डिटेल मिली थी। उसके खाते में मोटी रकम पाई गई है।

देर रात विजिलेंस पुलिस के साथ एई नौटियाल के आवास पर गई थी, जहां पर वह नहीं मिले, लेकिन घर की तलाशी में लाखों की एफडी के अलावा काफी कागजात बरामद हुए। विजिलेंस के निदेशक अशोक कुमार का कहना है कि एई टीपी नौटियाल के घर की तलाशी ली गई। जल्द ही वह भी कानून की गिरफ्त में होंगे।

स्टे की आड़ में चल रहा अवैध निर्माण
फार्म हाउस के नक्शे पर वैडिंग प्वाइंट चलाने वाले ने अपीलीय कोर्ट से एमडीडीए के नोटिस पर स्टे ले लिया। स्टे की आड़ में उसने फार्म हाउस के भीतर दोबारा अवैध निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। एमडीडीए ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर निर्माण पर तत्काल रोक लगाने को कहा है।

जोगीवाला के पास देव नारायण वर्मा नाम के व्यक्ति ने कुछ समय पूर्व फार्म हाउस का नक्शा पास कराया। कुछ समय बाद ही उसने फार्म हाउस को वैडिंग प्वाइंट के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इस पर आसपास के लोगों ने एमडीडीए से मामले की शिकायत की। शिकायत का संज्ञान लेते हुए एमडीडीए ने उसका चालान कर दिया। उसके बावजूद फार्म हाउस में निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ।

इसके बाद नोटिस का भी जवाब नहीं दिया। एमडीडीए ने फार्म हाउस मालिक को सीलिंग का नोटिस जारी कर दिया। इस पर उसने कंपाउंडिंग के लिए एप्लीकेशन देते हुए नक्शा जमा करवा दिया। वैडिंग प्वाइंट के मानकों से भिन्न होने के कारण एमडीडीए ने कंपाउंडिंग करने से इनकार कर दिया।

इस पर फार्म हाउस स्वामी अपीलीय अदालत से सीलिंग के नोटिस के खिलाफ स्टे ले आया। इसके बाद उसने दोबारा से निर्माण कार्य शुरू कर दिया। इस पर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया। एमडीडीए सचिव पीसी दुमका ने बताया कि फार्म स्वामी निर्देश के बावजूद भी काम नहीं रोक रहा है। इसलिए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई है।

एमडीडीए में मैनुअल कंपाउंडिंग पर रोक
सुपरवाइजर अजय कुमार के एक लाख की घूस लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद एमडीडीए ने मैनुअल कंपाउंडिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी है। उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने आरोपी सुपरवाइजर और प्रभारी सहायक अभियंता (एई) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के भी निर्देश दिए हैं। मामले की रिपोर्ट आने तक एई को कार्यालय से अटैच कर दिया गया है।

सुपरवाइजर के घूस लेते पकड़े जाने और प्रभारी सहायक अभियंता के भी संलिप्त होने के काम का मामला बृहस्पतिवार को पूरे दिन चर्चा में रहा। एमडीडीए कार्यालय में सभी अधिकारी और कर्मचारी मामले पर चर्चा करते दिखे। उपाध्यक्ष आर मीनाक्षी सुंदरम ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रभारी एई टीपी नौटियाल कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। विजिलेंस रिपोर्ट के बाद दोषियों की बर्खास्तगी व अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सचिव पीसी दुमका ने बताया कि मैनुअल कंपाउंडिंग के नाम पर आरोपी रकम ऐंठने का प्रयास कर रहे थे। पूर्व में भी इस तरह के मामलों में गड़बड़ी सामने आई है। जिसके बाद अब मैनुअल कंपाउंडिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब केवल ऑनलाइन कंपाउंडिंग ही की जा सकेगी। सभी जेई और सुपरवाइजरों के क्षेत्र में भी परिवर्तन किया जाएगा। विशेषकर लंबे समय से एक ही क्षेत्र में डटे जेई और सुपरवाइजरों को दूसरे क्षेत्रों में भेजा जाएगा।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें