घर लौटने को साधन नहीं मिला तो वे पैदल ही चल पड़े। रास्ते में हाथ-पैर जोड़ने पर कुछ चालकों ने उन्हें लिफ्ट देकर थोड़ी-थोड़ी दूरी तक राहत पहुंचाई लेकिन ज्यादातर सफर पैदल ही तय करना पड़ा। रास्ते में कहीं खाना नहीं मिला। कुछ दुकानें खुली मिली तो नमकीन, बिस्कुट और पानी पीकर भूख मिटाई।
उम्मीद थी कि पिथौरागढ़ से कोई बस मिल जाएगी लेकिन वह भी नहीं मिली। बस मिलने की उम्मीद में वे जैसे-तैसे पैदल चलकर टनकपुर तक पहुंचे तो यहां पुलिस ने उन्हें यहां रोक लिया। ओमकार का कहना है कि यहां रहने खाने की व्यवस्था सब ठीक है, लेकिन घर में परिवार परेशान हो रहा है।
लॉकडाउन के चलते भारत-नेपाल सीमा पर झूलापुल के गेट नहीं खुलने से धारचूला के साथ ही बलुवाकोट में बड़ी संख्या में नेपाली नागरिकों का जमावड़ा लग गया है। डीएम डॉ. विजय कुमार ने मंगलवार को धारचूला पहुंचकर यहां नेपालियों के लिए बनाए गए शिविरों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने सभी लोगों के लिए ठहरने और भोजन की उचित व्यवस्था करने के एसडीएम एके शुक्ला को निर्देश दिए।
डीएम ने राइंका जौलजीबी, बलुवाकोट, फायर स्टेशन निंगालपानी, स्टेडियम धारचूला तथा काजी हाउस में रह रहे करीब 850 नेपाली नागरिकों एवं मजदूरों को भोजन वितरण के साथ ही उनका हालचाल जाना। उन्होंने सभी से सामाजिक दूरी बनाए रखने को कहा। उन्होंने धारचूला में काली नदी किनारे बने काजी हाउस में रुके 165 मजदूरों को शिफ्ट करने के निर्देश दिए।
बाद में काजी हाउस में बनाए राहत शिविर को मौके पर ही राबाइंका में शिफ्ट कराया। इस दौारन नेपाली मजदूरों से बातचीत भी की। डीएम ने नेपाली नागरिकों से कहा कि उन्हें लॉकडाउन की अवधि तक आवागमन नहीं करना है। दोनों देशों की सीमाएं भी बंद हैं। यहां किसी भी व्यक्ति को किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। वहां मौजूद एसपी प्रीति प्रियदर्शनी ने सभी से लॉकडाउन का अनुपालन करने की अपील करते हुए सीओ धारचूला को काली नदी के किनारे गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए। इस दौरान सीओ विमल आचार्य, तहसीलदार नंदन राम, नायब तहसीलदार मनीषा बिष्ट, ईओ पालिका पीएस बोहरा, थाना प्रभारी विजेंद्र साह भी मौजूद रहे।
सोमवार देर रात पिथौरागढ़ के अलग अलग जगहों से 209 नेपाली नागरिक झूलाघाट पहुंच गए। नेपालियों ने बताया उन्हें कुछ लोगों ने झूलाघाट पुल खुलने की जानकारी दी थी। लॉकडाउन के चलते पिथौरागढ़ जिले के कस्बों और गांवों में दैनिक मजदूरी कर जीवन यापन करने वाले नेपाली रोजगार न मिलने से अपने वतन लौटना चाह रहे हैं। 14 अप्रैल को नेपाल का प्रमुख संक्राति का त्योहार होने से वह अपने घर जाना चाहते हैं।
हालांकि यहां पर नेपाली नागरिकों के लिए प्रशासन और कार्ड संस्था की ओर से भोजन की व्यवस्था की गई। थाना प्रभारी महेश चंद्र, राजस्व उपनिरिक्षक गोपाल डीनिया, कार्ड संस्था के सचिव सुरेंद्र आर्या सहयोग कर रहे हैं।