कोरोना संक्रमण को देखते हुए गांव लौटे पालाकुराली के चार युवाओं ने अब अपने पैतृक गांव में रहकर ही स्व-रोजगार के लिए कमर कस ली है। वह गाइड बनकर सैलानियों को प्राचीन ट्रैकिंग रूट पर ले जाएंगे। इसके साथ ही पर्यटकों को आरामदेह होम स्टे भी मुहैया कराएंगे। उन्हाेंने गांव के दस घरों को होमस्टे के लिए तैयार भी कर लिया है।
इन युवाओं अजय शंकर राणा, सुनील राणा, राजेश राणा और भूपेंद्र राणा ने पर्यटन स्थल चिरबटिया के साथ ही प्राचीन ट्रैक बुरांशकांठा, पंवालीकांठा, सौड़ बुग्याल समेत पालाकुराली-गंगी-भिलंग पर जानकारी भी पाराकुराली और बुरांशकांठा पेज पर दी है।
इंस्टाग्राम पर ऑफर उत्तराखंड एकाउंट पर भी उन्होंने ट्रैकिंग रूट के बारे में जानकारी दी है। गांव के हस्तशिल्प और रीति-रिवाजों की भी जानकारी दी है। मकसद यह है कि गांव की इस खासियत को पहचान मिल सके। इन रूटों पर जाने के लिए पर्यटकाें की कॉल आनी शुरू हो गई है। अभी कोरोना संक्रमण को देखते हुए इसमें स्थानीय पर्यटकों की कॉल अधिक है।
गांव के चारों ओर प्रकृति की नेमत
समुद्रतल से सात हजार फीट की ऊंचाई पर बसे पालाकुराली गांव के चारों तरफ प्रकृति की सुंदर नेमत है। यहां बारामासी पर्यटन की संभावना है। गांव से कुछ दूरी पर स्थित चिरबटिया को प्रदेश सरकार पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप में विकसित भी कर रही है।
पारंपरिक भोजन परोसेंगे
गांव में खोली, तिबारी और पठाल वाले मकानों में होमस्टे का प्रबंध किया जा रहा है। साथ ही पर्यटकों को पहाड़ी भोजन चौसा, फाणू, मंडुवे की रोटी, तिल व भंगजीरे की चटनी, लिंगुड़े का अचार, कफली, भटवाणी, थिंच्वाणी आदि परोसा जाएगा।
गांव के प्राकृतिक सौंदर्य को पर्यटन से जोड़ने के साथ जो युवा होम स्टे को बढ़ावा देना चाहते हैं, विभाग उनकी हरसंभव मदद करेगा। बस उन्हें कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
सुशील नौटियाल, जिला पर्यटन एवं सहासिक खेल अधिकारी, रुद्रप्रयाग