एसएसपी ने बताया कि दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। साथ ही मामले की जांच की जा रही है। इस फर्जीवाड़े में कोई और भी संलिप्त पाया गया तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
मुनिकीरेती थाना प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि दोनों आरोपियों को नरेंद्रनगर न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। उधर, मुनिकीरेती कोतवाली प्रभारी कमल मोहन भंडारी ने बताया कि विनय बिष्ट लैब से खास पहचान होने का हवाला देते हुए एक घंटे में आरटीपीसीआर रिपोर्ट उपलब्ध कराने की बात कहकर लोगों को फंसाता था।
वहीं शीतल फर्जी जांच रिपोर्ट का प्रिंट निकालती थी। दिल्ली से आए आठ युवकों से विनय बिष्ट ने आरटीपीसीआर जांच के लिए पांच हजार रुपये लिए थे। जिसमें से 1600 रुपये उसने शीतल स्नेही जाटव को दिए थे। कोतवाली प्रभारी के अनुसार पूछताछ में शीतल ने बताया कि इससे पहले वह 500 रुपये के हिसाब से 22 फर्जी रिपोर्ट तैयार कर दे चुकी है।
दोनों के खिलाफ संबधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया है। वहीं शीतल जिस लैब में काम करती थी उसके संचालक और एक अन्य कर्मचारी से भी पूछताछ की जा रही है।