कोविड काल के एक साल बीत जाने के बाद भी उत्तराखंड में सवा करोड़ की आबादी पर सिर्फ 842 वेंटिलेटर की व्यवस्था हो पाई है। एक साल के भीतर 726 वेंटिलेटर और 1120 आईसीयू बेड बढ़ाए गए हैं। पहले की तुलना सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए स्वास्थ्य सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर को रोकने में स्वास्थ्य इंतजाम कम पड़ रहे हैं।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 15 मार्च 2020 को मिला था। उस समय में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए प्रदेश के पास मात्र 116 वेंटिलेटर और 216 आईसीयू बेड थे। इसके साथ 673 ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड थे।
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कोविड काल के एक साल के भीतर सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचा और उपकरण बढ़ाए हैं। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में सरकार के ये इंतजाम कम पड़ गए हैं। पर्वतीय जिलों के अधिकतर अस्पतालों में आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड की सुविधा काफी कम है। जबकि मैदानी जिलों के साथ ही पहाड़ों में तेजी से संक्रमण फैल रहा है।
श्रेणी वर्ष 2020 वर्ष 2021
आईसीयू 216 1336
वेंटिलेटर 116 842
ऑक्सीजन बेड 673 6002
ऑक्सीजन कंसट्रेटर 275 3275
ऑक्सीजन सिलिंडर 1193 9917
यहां लगेंगे ऑक्सीजन प्लांट
प्रदेश में 9 ऐसे स्थान हैं जहां ऑक्सीजन प्लांट लगाए जाएंगे। जिनमें मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल चमोली, एसडीएच नरेंद्र नगर, जिला अस्पताल अल्मोड़ा, जिला अस्पताल चंपावत, जिला अस्पताल उत्तरकाशी, जिला अस्पताल पिथौरागढ़ शामिल है।
कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए सरकार की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश में आईसीयू बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन बेड की संख्या बढ़ाई जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
-अमित सिंह नेगी, सचिव स्वास्थ्य