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Coronavirus In Uttarakhand: स्कूलों में 10 तक भी नहीं पहुंच रही छात्रों की संख्या

Sun, 29 Nov 2020 06:29 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे अभिभावक
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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देहरादून में कोरोना काल में 10वीं और 12वीं के बच्चों के लिए स्कूल तो खोले गए हैं, लेकिन कोरोना के डर से अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं। आलम यह है कि छात्रों की उपस्थिति की संख्या दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पा रही है। जो बच्चे स्कूल आ रहे हैं वह सुरक्षा का ध्यान रखते हुए मास्क, सैनिटाइजर आदि का नियमित प्रयोग कर रहे हैं। 

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उत्तराखंड में सरकारी और प्राईवेट माध्यमिक स्कूलों में 10वीं और 12वीं की कक्षाओं को शुरू किया गया है। स्कूलों में छात्रों की संख्या और अन्य व्यवस्थाओं का शनिवार को अमर उजाला की टीम ने जायजा लिया तो पता चला दून कैंब्रिज, चिल्ड्रन एकेडमी और डीपीएस में तीन से पांच बच्चे ही आ रहे हैं।


पथरीबाग चौक स्थित श्री गुरु राम राय लक्ष्मण इंटर कॉलेज में बीते चार दिनों से 10 से 20 फीसदी ही बच्चे आ रहे हैं। शनिवार के दिन भी 10वीं कक्षा के 200 में से केवल 10 फीसदी बच्चे ही स्कूल आए। जबकि, 12वीं कक्षा के 158 में से भी 10 फीसदी बच्चे स्कूल आए। ऐसा ही हाल गढ़ी कैंट स्थित गोरखा मिलिट्री इंटर कॉलेज स्कूल का रहा। 
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10वीं और 12वीं कक्षा में कुल 14 बच्चे ही स्कूल आए। जबकि, दोनों कक्षाओं में 83 बच्चे हैं। स्कूल के प्रधानाचार्य ज्योति प्रकाश जगूड़ी ने बताया कि बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अभिभावक सहमति नहीं दे रहे हैं। जो बच्चे स्कूल आ रहे हैं उन्हें शिक्षक पढ़ा रहे हैं। साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी बच्चों को पढ़ाया जा रहा है।

उधर, सहस्त्रधारा रोड स्थित श्री गुरु राम राय पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य भावना उपाध्याय ने बताया कि दोनों कक्षाओं के बहुत कम बच्चे स्कूल आ रहे हैं। स्कूलों के शिक्षकों का कहना है कि स्कूल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर मेज-कुर्सी आदि को सैनिटाइज किया जा रहा है। सोशल डिस्टेंस का भी पालन किया जा रहा है।

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80 फीसदी स्कूल बंद होने की कगार पर : कश्यप

कोरोना काल के दौरान अभिभावकों की ओर से फीस जमा न करने से करीब 80 फीसदी स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। यह बात प्रिंसिपल प्रोगेसिव स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रेम कश्यप ने कहीं।

उन्होंने कहा कि स्कूल खुलने के बाद मात्र 30 फीसदी अभिभावकों ने फीस जमा की है। जबकि, स्कूल प्रबंधक को अपने शिक्षकों, कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन देने के साथ अन्य खर्चे भी उठाने पड़ रहे हैं।

कई स्कूल प्रबंधक की ओर से बैंक से ऋण लिया गया है। फीस न आने की वजह से वह बैंक की किस्त नहीं चुका पा रहे हैं। ऐसे में स्कूल बंद होने की कगार पर हैं। इसके लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए। बताया कि इस संबंध में शिक्षा सचिव समेत कई अधिकारियों को पत्र लिखा गया है।

स्कूल प्रबंधकों की ओर से बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई है। प्रदेश में कोरोना के मामले फिर बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। जब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं आ जाती तब तक बच्चों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई की बेहतर व्यवस्था तैयार करनी होगी। 
- राम कुमार सिंघल, अध्यक्ष, उत्तराखंड अभिभावक संघ
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