नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रदेश के जेलों में बंद कैदियों को पैरोल पर छोड़े जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईपावर कमेटी को दो सप्ताह के भीतर बैठक कर सात या सात साल से कम सजायाफ्ता बंदियों को पैरोल पर छोड़ने पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
बिना टेस्ट के किसी भी कैदी को नहीं छोड़ा जाना चाहिए
कोर्ट ने 6 जून तक इस संबंध में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा है। साथ में कोर्ट ने यह भी कहा है कि बिना टेस्ट के किसी भी कैदी को नहीं छोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट के पूर्व आदेश के क्रम में जेल महानिरीक्षक आईपी अंशुमान वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
उन कैदियों को जमानत या पैरोल पर रिहा किया जाए जिनके कोर्ट में ट्रायल या सजा के मामले विचाराधीन हैं
हरिद्वार निवासी ओमवीर सिंह ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि पिछले वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने एक हाईपावर कमेटी गठित करने का आदेश देते हुए सरकार को निर्देश दिए थे कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान जेल में बंद उन कैदियों को जमानत या पैरोल पर रिहा किया जाए जिनके अभी कोर्ट में ट्रायल चल रहे हैं या सजा के मामले विचाराधीन हैं।
कमेटी की सिफारिश पर पिछले साल 699 कैदियों को छोड़ा गया था। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कमेटी को दो सप्ताह में बैठक कर सात या सात साल से कम सजायाफ्ता बंदियों को छोड़ने पर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।