होम क्वारंंटीन में रह रही एक 76 वर्षीय महिला की मौत हो गई। मृतका अपने पति के साथ 02 जून से होम क्वारंंटीन में थी। नोडल स्वास्थ्य अधिकारी डा. अमरजीत साहनी ने बताया कि यह दंपत्ति 18 मार्च से दिल्ली में अपनी बेटी के पास था। लॉकडाउन की वजह से यह दंपति दिल्ली में ही फंस गया था।
02 जून को उक्त दम्पति काशीपुर में गढ़वाल सभा स्थित अपने निवास पर आ गये। स्वास्थ्य विभाग ने इन्हें होम क्वारंंटीन किया था। 08 जून को वृद्ध महिला को बुखार आया तो परिजन उसे अस्पताल ले गए। तब चिकित्सक को उक्त महिला के होम क्वारंंटीन में होंने की जानकारी नही थी। इसलिए उसे दवा देकर घर भेज दिया गया।
09 जून को महिला की तबियत ज्यादा बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती किया गया। मंगलवार रात्रि में उसकी मृत्यु हो गई। अस्पताल से मृत्यु प्रमाण लेकर शव को घर ले जाया गया। जानकारी होने पर नोडल अधिकारी ने होम क्वारंंटीन की सूची देखी, तो उसमें मृतका का विवरण देख वह सन्न रह गये।
उन्होंने तत्काल सूचना आईटीआई थाना पुलिस को दी। सूचना पर एसओ कुलदीप अधिकारी, एसआई प्रदीप पंत, एसआई सुप्रिया नेगी आदि मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मृतका का शव कब्जे में लेकर पंचनामा भरा। मृतका के शव का सैंपल जांच के लिए भेजा गया है। देर रात तक रिपोर्ट आने की संभावना है।
उत्तराख्ंाड होईकोर्ट ने विमान से आने वाले प्रवासियों के मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकार, मुख्य सचिव और नागरिक उड्डयन सचिव को आदेश दिया है कि यात्रियों को जबरन पेड क्वारंंटीन में न भेेजा जाए।
कोर्ट ने कहा है कि यात्रियों की सहमति से ही उन्हें पेड या सरकारी क्वारंटीन सेंटरों में भेजा जाए। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई हुई।
क्वारंटीन सेंटरों में 'कैद' लोगों का टूट रहा धैर्य
ऋषिकेश के सीमावर्ती क्षेत्रों मुनिकीरेती, श्यामपुर, रायवाला, डोईवाला के तमाम क्वारंटीन सेंटरों में इस तरह की तमाम कहानियां बिखरी पड़ी हैं। जहां लोगों को क्वारंटीन अवधि पूरी किए कई-कई दिन हो गए, लेकिन उन्हें घर नहीं भेजा जा रहा है। इनमें से बहुत से लोगों के तो सैंपल भी नहीं लिए गए हैं।
जिनके सैंपल लिए गए हैं, उनकी रिपोर्ट न आने की बात प्रशासन की ओर से कही जा रही है। जबकि कुछ मामलों में क्वांरटीन किए गए लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, लेकिन प्रशासन इसके पीछे अपने तर्क दे रहा है। जैसे - रूम पार्टनर की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। जब तक फिर से संबंधित व्यक्ति की रिपोर्ट निगेटिव नहीं आ जाती, हम इन्हें घर नहीं भेज सकते।
क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे लोगों की सेहत के साथ ही कम्यूनिटी के स्वास्थ्य को लेकर भी प्रशासन गंभीर है। यह मामला मेरे संज्ञान में है। दरअसल, कई क्वारंटीन सेंटरों में एक-एक कमरे में दो-दो लोग तो कुछ बड़े हॉल में एक साथ कई लोग रह रहे हैं। इनमें से किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है तो हम उसके रूम पार्टनर को भी ऐसे नहीं छोड़ सकते। जाहिर सी बात है वह भी संक्रमित हो गया होगा। ऐसे कुछ मामलों में कुछ लोगों को घर भेजने में देरी हो रही है। मेरा ऐसे लोगों से अनुरोध है कि वे थोड़ा सब्र रखें।
- मंगेश घिल्डियाल, जिलाधिकारी टिहरी