प्रदेश में लगातार कोरोना संक्रमित मामले बढ़ने से एक माह के भीतर रिकवरी दर में 23 प्रतिशत की कमी आई है। संक्रमित मरीजों के ठीक होने की दर में बागेश्वर जिला सबसे आगे हैं। वहीं, हरिद्वार की रिकवरी दर सबसे कम है।प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा सात हजार के पार हो गया है। वहीं, चार हजार से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं।
जून के आखिर में संक्रमित मामलों में ठहराव की स्थिति आने से दो जुलाई को प्रदेश की रिकवरी दर 81 प्रतिशत थी। नौ जुलाई तक भी रिकवरी दर की यही स्थिति थी। इसके बाद संक्रमित मामले बढ़ने के कारण रिकवरी दर लगातार कम होती गई। 23 जुलाई को 62 प्रतिशत और 31 जुलाई तक प्रदेश की रिकवरी दर 58 प्रतिशत पर आ गई।
पर्वतीय जिले बागेश्वर, चमोली, टिहरी, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, अल्मोड़ा की रिकवरी दर मैदानी जिलों से बेहतर है। देहरादून जिले में संक्रमित मरीजों के ठीक होने की दर 70 प्रतिशत है। हरिद्वार जिले की 36 प्रतिशत और ऊधमसिंह नगर जिले की 37 प्रतिशत रिकवरी दर है।
कोरोना आंकड़ों का अध्ययन कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष अनूप नौटियाल का कहना है कि कोरोना संक्रमित मामले बढ़ने के साथ ही रिकवरी दर लगातार कम हो रही है। यह स्थिति चिंताजनक है। मैदानी जिलों की तुलना में पर्वतीय जिलों में रिकवरी दर काफी बेहतर है।
कोरोना के लक्षण वाले और कम गंभीर कैदियों व बंदियों को जेल भेजने से पहले सेलाकुई स्थित माया इंस्टीट्यूट में रखा जाएगा। इसके अलावा जो नए आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाएंगे, उन्हें भी पहले 18 दिन तक माया इंस्टीट्यूट और अन्य क्वारंटीन सेंटरों में रखा जाएगा। इसके अलावा महिला आईटीआई में भी उन्हें रखने की व्यवस्था की जा रही है। स्वस्थ होने पर ही उन्हें जेल अथवा अन्यत्र भेजा जाएगा।
शनिवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीसी रमोला ने चिकित्सा टीम और पुलिस व जेल कर्मियों के साथ क्वारंटीन सेंटर का निरीक्षण किया। साथ ही वहां पर चिकित्सा सुविधाएं और दवाओं आदि का भी निरीक्षण कर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
बता दें,जिला कारागार सुद्धोवाला में रखे गए 98 कैदियों और बंदियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। जिन्हें राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई सजायाफ्ता और खूंखार कैदी भी शामिल हैं। कैदियों पर नजर रखने और अस्पताल कर्मियों की सुरक्षा को देखते हुए दून अस्पताल प्रशासन के साथ ही स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, जेल व जिला प्रशासन और शासन में भी मंथन का दौर चल रहा है।
निर्णय लिया गया कि जो मरीज ज्यादा गंभीर नहीं हैं, उन्हें क्वारंटीन सेंटरों में रखा जाएगा। इनमें से चार बंदियों को सर्वे चौक स्थित कोविड केयर सेंटर में शिफ्ट किया जा चुका है। 12 कैदियों को क्वारंटीन सेंटर में भेजा जा चुका है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि अन्य कम लक्षणों और बिना लक्षणों वाले कोरोना संक्रमित कैदियों को भी क्वारंटीन सेंटर रेफर किया जा रहा है।