कोरोना संक्रमित कैदियों के भर्ती होने के कारण दून अस्पताल मिनी जेल बन गया है। ऐसे में पुलिस की चिंताएं भी बढ़ती जा रही हैं। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस ने और अधिक फोर्स तैनात कर दी है।
साथ ही सीसीटीवी कैमरों भी जल्द लगा दिए जाएंगे। बताया जा रहा है कि कैदी अगले 14 से 20 दिन तक भर्ती रह सकते हैं। ऐसे में यहां की सुरक्षा चुनौती से कम नहीं होगी।
दरअसल, यदि एक कैदी भी अस्पताल में इलाज के लिए आता है पुलिस की धड़कनें तेज हो जाती हैं। उसकी सुरक्षा के लिए अंदर और बाहर फोर्स तैनात कर दी जाती है। लेकिन, वर्तमान में दून अस्पताल में एक दो नहीं बल्कि 98 कैदी इलाज करा रहे हैं। इनमें से किसी की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है।
ऐसे में उनमें से शातिर किस्म के कैदियों के भागने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को दो सुरक्षा घेरों में बांटा गया है।
बाहर के घेरे में पुलिस और पीएएसी के 100 से अधिक जवान तैनात हैं। जबकि, अंदर के घेरे यानी वार्ड में फिलहाल किसी की तैनाती नहीं है।
यहां सिर्फ तालों और निगरानी के भरोसे ही सुरक्षा की जा रही है। यहां पर सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए भी पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन को लिखा है। बताया जा रहा है कि इनमें से कई कैदी जघन्य अपराधों में आजीवन कारावास की सजा भी भुगत रहे हैं।
कैदियों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ अब सुरक्षा बल की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। अभी तक दो प्लाटून पीएसी और लगभग 30 से 35 पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है।
मगर, अब एसपी सिटी श्वेता चौबे का कहना है कि उन्होंने एक कंपनी पीएसी की मांग और की है।
आईजी भी रख रहे नजर
आईजी गढ़वाल अभिनव कुमार भी लगातार दून अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था के बारे में अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैदियों को उनकी श्रेणी के आधार पर अलग अलग रखने पर विचार किया जा रहा है।
मसलन, सामान्य अपराध वाले कैदी अलग वार्ड में और जघन्य अपराध व आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों को अलग वार्ड में भर्ती किया जाए।
दून अस्पताल में कैदियों वाले वार्ड को जेल भी घोषित किया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस तरह के निर्णय पर भी विचार किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि इसके बाद यहां पर पुलिस के अलावा अंदर के हिस्से में जेल का फोर्स भी तैनात किया जाएगा। इसके साथ ही अन्य व्यवस्थाएं भी जेल की तरह ही की जा सकती हैं। हालांकि, अभी तक इस बात पर कोई ठोस या लिखित पत्राचार किसी की ओर से किए जाने की सूचना नहीं है।
बता दें कि किसी भी कैदी के जेल से बाहर जाने पर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जिला पुलिस पर ही होती है। चूंकि, ऐसी दशा में दो चार या 10 बीस कैदी ही होते हैं। लेकिन, यहां एक ही जगह पर 98 कैदियों की बात है तो व्यवस्थाएं भी अलग रूप ले सकती हैं। इन कैदियों को यहां चंद घंटे नहीं बल्कि 10 से 20 दिन भी रुकना पड़ सकता है। माना यह भी जा रहा है कि कैदियों की संख्या बढ़ भी सकती है। लिहाजा, ऐसे में यहां पर सुरक्षा व्यवस्था भी जेल की ही तरह की जाए। अभी तक अंदर कैदियों की निगरानी के लिए कोई पुलिस तैनात नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक दून अस्पताल के इस वार्ड को जेल भी घोषित किया जा सकता है। ताकि, अंदर के हिस्से में जेल के फोर्स को तैनात किया जा सके। चूंकि, कैदियों के आचार व्यवहार से वहां का फोर्स ही परिचित रहता है। ऐसे में उनके सहारे कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था और भी पुख्ता की जा सकती है। साथ ही साथ अस्पताल के बाहर पुलिस का पहना बदस्तूर जारी रहेगा। सूत्रों ने बताया कि अभी यह विचार मौखिक स्तर पर है। जल्द ही इसमें लिखित प्रक्रिया भी अमल में लाई जा सकती है।