प्रदेश में कोरोना संदिग्ध मरीजों की सैंपल जांच के लिए चार मैदानी जिलों में अलग से सेंटर बनाए जाएंगे। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल के जिलाधिकारियों को सेंटर बनाने के आदेश दिया हैं। इन सेंटरों में सैंपल जांच का काम निजी पैथोलॉजी को दिया जाएगा। सेंटरों में एंटीजन और आरटी पीसीआर दोनों ही तरह से सैंपलों की जांच होगी।
वर्तमान में इन चार मैदानी जिलों में कोरोना मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। संक्रमण को सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए सरकार का सैंपलिंग बढ़ाने पर फोकस है। सरकारी कोविड जांच लैब पर दबाव कम करने के साथ ही हाई रिस्क, बाहरी राज्यों से आने वाले, संदिग्ध लक्षण या संपर्क में आने वाले लोगों की सैंपल जांच के लिए अलग से सेंटर बनाए जाएंगे।
जांच के लिए अलग से बनने वाले सेंटरों में उन्हीं लोगों के सैंपल टेस्ट किए जाएंगे। जिन्हें कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम और विभाग के डॉक्टरों की ओर से जांच के लिए कहा जाएगा। सेंटरों पर जांच का भुगतान विभाग के माध्यम से किया जाएगा।
प्रभारी सचिव स्वास्थ्य डॉ. पंकज कुमार पांडेय का कहना है कि सैंपलिंग के लिए चार जिलों में अलग से सेंटर बनाए जाएंगे। जिन सेंटरों को निजी पैथोलॉजी के माध्यम से संचालित किया जाएगा। सेंटर पर पूरा स्टाफ निजी लैब का होगा। विभाग की ओर से जिन लोगों के लिए जांच के लिए कहा जाएगा। सेंटरों पर उन्हीं की जांच की जाएगी। जांच का भुगतान विभाग करेगा।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण के साथ मरीजों की मृत्यु दर भी बढ़ रही है। पहाड़ों से ज्यादा मैदानी जिलों में संक्रमितों की मौत हुई है। कोरोना संक्रमितों की कुल मौत में से 92 प्रतिशत देहरादून, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और नैनीताल जिले में हुई है। वहीं, नौ पर्वतीय जिलों में अब तक मात्र आठ प्रतिशत मरीजों की मौत हुई है।
देश में कुल संक्रमितों में अब तक 1.84 प्रतिशत मरीजों की मौत हुई है। जबकि उत्तराखंड में ये दर 1.33 प्रतिशत है। देहरादून जिले में सबसे अधिक मृत्यु 3.35 प्रतिशत है। वहीं, नैनीताल में 1.95 प्रतिशत, हरिद्वार में 00.84 प्रतिशत, ऊधमसिंह नगर में 00.47 प्रतिशत है।
जबकि पौड़ी जिले में 00.97 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 00.87 प्रतिशत, चंपावत में 00.80 प्रतिशत, टिहरी में 0.22 प्रतिशत, बागेश्वर में 00.48 प्रतिशत, उत्तरकाशी में 00.29 प्रतिशत, अल्मोड़ा में 00.48 प्रतिशत और रुद्रप्रयाग जिले में 00.53 मृत्यु दर है। चमोली एक मात्र जिला है, जहां पर एक भी कोरोना संक्रमित की मौत नहीं हुई है।
चमोली जिले में बुधवार को कोरोना संक्रमण के 16 नए मामले सामने आए हैं। इनमें जोशीमठ से 10 सेना के जवान हैं। इसके अलावा तीन मजौठी, एक सोनला गांव तथा एक व्यक्ति गौचर में संक्रमित मिला। ये सभी पूर्व में संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे, जबकि भराड़ीसैंण क्वारंटीन सेंटर में रह रहे एक यूपी के मजदूर की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 265 हो गई है।
जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कहा कि सभी संदिग्ध व्यक्तियों के सैंपल जांच के लिए भेजे जा रहे हैं। वहीं, कोटद्वार में विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों समेत 14 लोग कोरोना संक्रमित मिले। इनमें एक पुलिस कर्मी भी शामिल है। सीएमओ पौड़ी डा. मनोज बहुखंडी ने बताया कि एक आला अधिकारी के संक्रमित होने के बाद जिला उद्योग केंद्र को तीन दिन के लिए सील कर दिया है। वहीं दुगड्डा में चार सब्जी बेचने वालों में कोरोना के लक्षण मिलने पर उन्हें होम क्वारंटीन कर दिया है।
गैरसैंण में पंजाब नैशनल बैंक में कार्यरत एक कर्मचारी हरिद्वार में कोरोना पॉजिटिव मिला। बैंक शाखा को बंद कर दिया गया है। डॉ. फिरोज खान ने पॉजिटिव कर्मी के संपर्क में आए कर्मियों को सात दिनों तक होम क्वारंटीन कर दिया है। बैंक कर्मी इलाज के लिए 22 अगस्त को गैरसैंण से हरिद्वार गया था। वहां उसका 23 अगस्त को कोरोना टेस्ट हुआ और 25 अगस्त को रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
प्रशासन ने बुधवार को राजपुर रोड स्थित 41 कमरों की क्षमता वाले होटल इंद्रलोक को कोविड केयर सेंटर बना दिया है। इसका अधिग्रहण कर लिया गया है। यहां कोविड-19 संक्रमित लोगों को रखा जाएगा। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव के निर्देश पर इस कार्रवाई को पूरा कर लिया गया है।
डीएम ने बताया कि हर कमरे का रोजाना 1500 तथा भोजन के रोजाना 450 रुपये भुगतान किया जाएगा। वहीं, उन्होंने बताया कि नगर निगम ऋषिकेश के चंद्रेश्वर नगर की न्यू त्रिवेणी कालोनी के गली नंबर-1 एवं विकासनगर स्थित वार्ड नंबर-10, शिवपुरी विकासनगर को कंटेनमेंट जोन से मुक्त कर दिया गया है।
यहां कोरोना संक्रमितों के मिलने के बाद 14 दिन तक एक्टिव सर्विलांस किया गया, इस दौरान यहां किसी भी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण नहीं मिले। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संस्तुति पर दोनों क्षेत्रों को कंटेनमेंट जोन से मुक्त कर दिया गया।
58 घरों में मिला लार्वा, नष्ट किया
एंटी डेंगू अभियान के तहत बुधवार को जिले में आशा कार्यकत्रियों एवं फैसिलिटेटर्स की 38 टीमों ने 506 घरों का निरीक्षण किया। इस दौरान 58 घरों तथा 338 कंटेनर में मच्छर का लार्वा मिला, जिसे टीम ने नष्ट कर दिया। साथ ही लोगों को कोरोना, डेंगू-मलेरिया आदि को लेकर जागरुक भी किया गया।
दून पहुंचे 458 लोग क्वारंटीन
डीएम डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बुधवार को दून पहुंचे 458 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें क्वारंटीन किया गया। इसके अलावा 1448 लोगों के सैंपल लिए गए। वहीं, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने पर 201 लोगों के चालान किए गए। फ्लाइट से 318 प्रवासी जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। जबकि 257 लोग फ्लाइट से दूसरे राज्य रवाना हुए। आशा कार्यकर्ताओं ने 2124 लोगों का फॉलोअप किया। होम क्वारंटीन किए गए 5070 लोगों को फोन कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली गई। उधर, क्वारंटीन किए गए 46 लोगों की काउंसिलिंग की गई।