कोरोना संक्रमित कई मरीजों में पल्मोनरी एंबॉलिज्म की समस्या जिंदगी पर भारी पड़ रही है। विशेषज्ञों के अनुसार इलाज के दौरान या इलाज के उपरांत कई मरीज पल्मोनरी एंबॉलिज्म के शिकार हो रहे हैं। पल्मोनरी एंबॉलिज्म की समस्या से ग्रसित मरीजों की जिंदगी बचाना काफी मुसीबत भरा है।
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कोरोना संक्रमित कई मरीजों में पल्मोनरी एंबॉलिज्म की समस्या देखने को मिल रही
मैक्स हॉस्पिटल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. योगेंद्र सिंह के मुताबिक कोरोना संक्रमित कई मरीजों में पल्मोनरी एंबॉलिज्म की समस्या देखने को मिल रही है। इस समस्या में मरीज के फेफड़ों को रक्त की आपूर्ति करने वाली वाहिकाओं में अचानक बड़ा थक्का बन जाता है।
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पल्मोनरी एंबॉलिज्म को लेकर बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं
इसके चलते खून की आपूर्ति रुक जाती है और यही जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। डॉ. योगेंद्र के मुताबिक मरीजों को पल्मोनरी एंबॉलिज्म को लेकर बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। कई संक्रमित मरीज पल्मोनरी एंबॉलिज्म की समस्या के बावजूद ठीक हो गए। इलाज के दौरान या इलाज के उपरांत डी डायमर टेस्ट कराने व ब्लड थिनर मेडिसिन के इस्तेमाल से मरीजों की जिंदगी बचाई जा सकती है।
कोरोना से मिली निजात तो जरूर कराएं डी डायमर, सीआरपी टेस्ट
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. तनुज भाटिया के अनुसार कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद मरीजों को डी डायमर के साथ ही सीआरपी टेस्ट जरूर कराना चाहिए। बकौल डॉ. भाटिया कोरोना से ठीक होने के बाद कई मरीजों में खून के गाढ़ा होने की शिकायतें आ रही हैं। खून गाढ़ा होने की स्थिति में ही पल्मोनरी एंबोलिज्म की समस्या हो रही है।