आमतौर पर उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से देहरादून, हल्द्वानी या ऊधमसिंह नगर के अस्पतालों के लिए मरीजों को रेफर किया जाता है। इन जगह से भी दिल्ली के बड़े अस्पतालों के अलावा रोहतक व चंडीगढ़ पीजीआई में मरीज रेफर किए जाते हैं। वर्तमान में इन शहरों में भी हालात बद से बदतर हैं।
चिकित्सकीय सुविधाएं बेमानी साबित हो रही हैं। ऐसे में कई मरीजों को देहरादून समेत उत्तराखंड के अन्य शहरों के लिए रेफर किया जा रहा है। दिल्ली से चंपावत रेफर की गई कोरोना संक्रमित महिला इसका ताजा उदाहरण है। दिल्ली निवासी कोरोना संक्रमित महिला को वहां वेंटिलेटर न मिलने पर ऑनलाइन दूरस्थ जनपद चंपावत में उपलब्धता का पता चला। आनन-फानन परिजनों ने महिला को दिल्ली से चंपावत के अस्पताल रेफर कराया, लेकिन वेंटिलेटर मिलने के बावजूद महिला की मौत हो गई।
सरकार का स्टैंड समझ में नहीं आ रहा : डॉ. चौधरी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तराखंड के प्रदेश महासचिव वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. डीडी चौधरी ने बताया कि बड़े-शहरों में अस्पतालों में जगह नहीं बची है। देहरादून में भी वेंटिलेटर ऑक्सीजन, रेमडेसिविर और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं का घोर अकाल हो गया है। सरकार की स्थिति समझ में नहीं आ रही है। सब कुछ अव्यवस्थित हो गया है।
सरकार को इसे ठोस कदम उठाकर ठीक करना होगा। ऑक्सीजन सिलेंडर, जीवन रक्षक दवाओं आदि के जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के साथ ही मरीजों को समुचित चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सरकार को सभी चीजों का नियंत्रण अपने हाथ में लेना होगा।
उन्होंने बताया कि उनके क्लीनिक में भी दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से लोगों के चिकित्सीय परामर्श के लिए फोन आ रहे हैं। कई लोग बेड और ऑक्सीजन की उपलब्धता के बारे में भी पूछ रहे हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी इसी तरह की स्थितियां हैं। कोरोना संक्रमण के तेजी से हो रहे प्रसार को रोकने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाने की सख्त आवश्यकता है।