राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के फिजिशियन डॉ. कुमार जी. कौल ने बताया कि मोटापे से ग्रस्त, जिसे मेडिकल की भाषा में ऑब्स्ट्रक्टिव स्लिप एपनिया सिंड्रोम कहते हैं, वह कोरोना मरीजों के लिए बहुत खतरनाक साबित हो रहा है। छाती के नीचे जो डायप्राम होती है, वह सांस लेते समय खुलती रहती है। मोटापा ज्यादा होने से वजन के कारण उस पर प्रेशर बढ़ जाता है।
जिस कारण इंसान सांस ठीक से नहीं ले पाता है। कोरोना में अगर मरीज को निमोनिया हो जाए तो डायप्राम पर और प्रेशर आ जाता है। जिसके चलते वह खुलता नहीं है और सांस उखड़ने लगती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
इस कारण ज्यादातर मरीजों की हालत खराब होने लगती है और कई की मृत्यु तक हो जाती है। उन्होंने बताया कि दून अस्पताल में भी इस तरह के कई मरीज पहुंच रहे हैं। इसलिए उन्होंने सलाह दी कि हल्की एक्सरसाइज जरूर करें और ऐसी चीजें खानपान में शामिल न करें जो मोटापे को बढ़ाती हैं।