उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों से एक बार फिर प्रदेश सरकार की पेशानी पर बल हैं। विकास की नई योजनाओं की तैयारी में जुटे सरकारी तंत्र की भी दुविधा बढ़ गई है। निवेशकों को रिझाने के लिए सरकार सितंबर-अक्तूबर में वेलनेस समिट करने की तैयारी में है। लेकिन जिस संख्या में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उससे आयोजक चिंता में हैं।
दरअसल, बीते साल अप्रैल में भी वेलनेस समिट आयोजित करने की तैयारी थी, लेकिन उस वक्त भी कोरोना संक्रमण फैलने के कारण आयोजन स्थगित करना पड़ गया था। वहीं, राज्य में अनलॉक के बाद राज्य में औद्योगिक निवेश की स्थिति में सुधार हुआ है।
पिछले छह महीने में 1642.78 करोड़ निवेश के 31 प्रस्तावों को एकल खिड़की के माध्यम से सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। दावा है कि इनसे 4814 लोगों को रोजगार मिलेगा। सैकड़ों करोड़ के कई और प्रस्ताव भी पाइपलाइन में हैं। अब जब निवेश की उम्मीदों को पंख लगे हैं, ऐसे में कोरोना के बढ़ते मामलों ने उद्योग विभाग की चिंता बढ़ा दी है।
निवेश बढ़ेगा तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि राज्य में जितना अधिक निवेश बढ़ेगा, रोजगार के उतने ही अधिक अवसर बढ़ेंगे। 2018 में निवेशक सम्मेलन में विभिन्न सेक्टरों में 124.36 करोड़ के 601 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें 3.53 लाख रोजगार प्रस्तावित हैं। कोरोना के कारण सम्मेलन में हुए समझौता ज्ञापनों को धरातल पर उतारने में रुकावटें आईं।
कदम सुधार की ओर हैं
उद्योग विभाग का दावा है कि कोरोना के बाद से स्वरोजगार आधारित सेक्टर के नतीजे उत्साहित करने वाले हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 3000 लाभार्थियों का लक्ष्य पूरा हो चुका है। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना का लक्ष्य भी पार हो चुका है।
कोरोनाकाल के बाद से औद्योगिक निवेश की स्थिति में सुधार है। पिछले छह महीने में सिंगल विंडो सिस्टम के तहत 1642 करोड़ के निवेश को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। सितंबर-अक्तूबर में वेलनेस समिट की तैयारी है।
- सचिन कुर्वे, सचिव, उद्योग