डॉक्टरों की सलाह के बावजूद कुछ मरीज अस्पतालों से छुट्टी लेने में आनाकानी कर रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर दोबारा भर्ती करने की जरूरत पड़ी तो बेड न मिलने की मुसीबत झेलनी पड़ेगी। फिलहाल ऐसे मरीजों और उनके तीमारदारों की डॉक्टर काउंसिलिंग कर रहे हैं।
दरअसल कोरोना संक्रमित मरीजों के दिन प्रतिदिन बढ़ रही है। सभी छोटे बड़े सरकारी और निजी अस्पतालों में बेड और आईसीयू की भी व्यवस्था कम पड़ रही है। कई मरीजों को बिना इलाज के लौटाना अस्पतालों के प्रबंधन की मजबूरी है। ऐसे में जो लोग अस्पताल में भर्ती होने के बाद काफी कुछ स्वस्थ हो रहे हैं, उनमें से कुछ मरीज और उनके परिजन अस्पताल से छुट्टी लेने में आनाकानी कर रहे हैं।
मरीज और परिजन चाहते हैं कि वह कुछ दिन और डॉक्टरों की देखरेख में रहें। डॉक्टर उन्हें सलाह दे रहे हैं कि उनकी सेहत पहले से बेहतर होने पर ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है। साथ ही उन्हें होम आइसोलेशन के फायदे बताए जा रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए ठीक हो रहे मरीजों को होम आइसोलेशन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि गंभीर मरीजों को भी उपचार दिया जा सके।