कोरोना संक्रमण और उसके उपचार के बीच उत्तराखंड के विभिन्न अस्पतालों में कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे डाॅक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ समेत कोरोना की डयूटी में तैनात अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर शोध शुरू कर दिया गया है।
इसमें खासकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शोध किया जाना है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष सयाना के निर्देश पर एनॉटमी के एचओडी और मनोचिकित्सक डाॅ. एमके पंत ने यह शोध शुरू किया है।
डाॅ. पंत अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे डाॅक्टरों, मेडिकल स्टाफ से कुछ प्रश्न करेंगे। जिसमें इस दौरान के उनके अनुभव, चुनौतियां, परिवार से अलग रहने की मुश्किलें, काम के दौरान मरीजों का व्यवहार, उन्हें अटेंड करने आदि जैसे सवाल शामिल हैं।
डाॅ. पंत का कहना है कि लोगों को मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। अब तक कोरोना के जो मरीज ठीक हुए हैं, उसका एक मुख्य कारण उनका मानसिक तौर पर मजबूत होना भी रहा है।
लाॅकडाउन के चलते कई लोग घरों में रहकर चिड़चिड़ापन और अवसाद की तरफ जा रहे हैं। शराब के आदी कुछ लोगों में भी अचानक शराब छूटने से इसके सिम्टम्स दिख रहे हैं। वहीं, कई लोग हल्की खांसी, बुखार से कोरोना की आशंका और आर्थिक मंदी व रोजगार पर संकट के डर से भी अवसाद में आ रहे हैं।
ऐसे में प्रदेश भर से आने वाले मरीजों की काउंसिलिंग का जिम्मा डाॅ. एमके पंत को सौंपा गया है। उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज में मरीजों की काउंसिलिंग शुरू की है। तनाव, अवासद, चिड़चिड़ापन, घबराहट आदि में फोन, मैसेज और वीडियो कॉल के माध्यम से शाम पांच से छह बजे तक उनके मोबाइल नंबर 9917979743 पर संपर्क किया जा सकता है।