राजकीय जिला अस्पताल कोरोनेशन के कोविड के नोडल अधिकारी एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट ने बताया कि जैसा कि इस बीमारी के नाम से ही स्पष्ट है कि इसमें मरीज को संक्रमण तो हो रहा होता है, लेकिन लक्षण न दिखने और सांस लेने आदि कोई दिक्कत न होने के कारण इंसान इस खुशफहमी में रहता है कि उसे कोरोना संक्रमण नहीं है।
इसके चलते वह सही समय पर दवाई शुरू नहीं कर पाते और न ही अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में फेफड़ों में सूजन आने पर ऑक्सीजन रक्त में नहीं मिल पाती। मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। अन्य अंग भी खराब होने लगते हैं।
मसूरी रोड स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के वरिष्ठ सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वैभव चाचरा ने बताया कि इस तरह के मामलों में मरीज को जल्द ही वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है। थोड़ा भी संदेह होने पर हर छह घंटे में सावधानीपूर्वक अपने शरीर के ऑक्सीजन और पल्स रेट की जांच करते रहें।
ऑक्सीजन स्तर 90 प्रतिशत से नीचे जाने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या अस्पताल पहुंचे। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉ. नारायण जीत सिंह ने बताया कि इसमें जरूरी है कि व्यक्ति को नियमित अंतराल पर अपना ऑक्सीजन स्तर जांचते रहना चाहिए।