सरकारी अस्पतालों में प्रशासनिक हस्तक्षेप किया जा रहा है। जिलाधिकारियों के माध्यम से अस्पतालों में तहसीलदार और पटवारियों को नामित कर अस्पतालों के निरीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। इससे डॉक्टरों की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंच रही है।
विभागीय और प्रशासनिक जांच में अस्पताल में हुई मौत पर डॉक्टरों की लापरवाही बता कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। संघ का कहना है कि सभी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों के काम करने के घंटे तय है। लेकिन डॉक्टर चौबीस घंटे की सेवाएं दे रहे हैं।
संघ ने एलान किया कि एक से सात सितंबर तक पूरे प्रदेश के डॉक्टर काली पट्टी बांध कर विरोध करेंगे। यदि सरकार मांगे नहीं मानती है तो आठ सितंबर को डॉक्टर वीआरएस लेंगे और सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे। इस मौके पर महासचिव डॉ. मनोज वर्मा समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।