बालरोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. उत्कर्ष शर्मा के मुताबिक बच्चों में प्राकृतिक रूप से बहुत अधिक इननेट इम्यूनिटी पाई जाती है जो बच्चों को बीमारियों से लड़ने की अद्भुत क्षमता प्रदान करती है। यही नहीं एक माह से लेकर 18 साल तक के बच्चों को पिछले डेढ़ दशक में जो टीकाकरण किया गया है।
इसकी वजह से बच्चों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही बरकरार है। ऐसे में बच्चों में कोरोना का संक्रमण बहुत अधिक होगा इसकी संभावनाएं बहुत कम है। फिर भी एहतियात बरतने की जरूरत है।
बच्चों के बाहर से संक्रमित होने का खतरा बहुत कम
डॉ. उत्कर्ष शर्मा का कहना है कि फिलहाल पिछले डेढ़ साल से ज्यादातर बच्चे घरों में कैद हैं और वे बहुत ही कम घर से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में उनके बाहर से कोरोना संक्रमित होने का खतरा बहुत कम है। लिहाजा अभिभावकों को खास ख्याल रखना होगा।
अभिभावक जब भी घर से बाहर से आएं तो यह मानकर चलें कि वे कोरोना संक्रमित होकर आ रहे हैं। ऐसे में वे शरीर की पूरी साफ करने के साथ ही सैनिटाइजेशन करने के बाद ही बच्चों के संपर्क में आएं। अगर अभिभावक ख्याल रखेंगे तो बहुत अधिक संख्या में बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सकेगा।