58 प्रतिशत मरीज भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर मर गए, जबकि 27 प्रतिशत मरीज भर्ती होने के 12 घंटे के भीतर ही मर गए। इन लक्षणों के आधार पर समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी है। इसमें सलाह दी गई है कि कोविड से बचाव के सभी दिशा-निर्देशों का बेहद कड़ाई से पालन कराने की जरूरत है।
इसके अलावा हर सीएचसी, पीएचसी स्तर तक भी कोविड जांच और इलाज की व्यवस्था की जाए। यहां मरीज के गंभीर होते ही उसे सीधे हायर सेंटर रेफर किया जाए। इससे कोरोना से होने वाली मौतों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
समिति ने यह भी पाया है कि अभी भी अधिकतर लोग कोरोना के लक्षण होने पर घरेलू उपचार को तवज्जो दे रहे हैं, जिस वजह से महामारी फैल रही है। लिहाजा, जागरूकता पर बल दिया जाए ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लक्षण आने पर तत्काल अपने निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं और इलाज कराएं।
कोविड की दूसरी लहर में वायरस काफी जहरीला है। बुखार आदि के लक्षण आने पर भी लोग जांच और इलाज के बजाए घर पर ही उपचार ले रहे हैं, जिस वजह से इसका प्रकोप बढ़ता जा रहा है। लोगों को जागरूक करना होगा, ताकि वह समय से जांच और इलाज कराएं। तभी जाकर कोरोना के प्रकोप से निजात मिलेगी।
-प्रो. हेम चंद्र, अध्यक्ष, सलाहकार समिति