हरिद्वार केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव अनिल अरोड़ा ने बताया कोविड की पहली लहर के दौरान मेडिकल स्टोर संचालकों ने भारी मात्रा में रेमडेसिविर इंजेक्शन मंगाए गए थे। इन इंजेक्शन की एक्सपायरी केवल तीन माह की होती है। तब इंजेक्शन की डिमांड न के बराबर थी। इंजेक्शन एक्सपायर होने के चलते मेडिकल स्टोर संचालकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। इसके बाद कंपनियों ने इंजेक्शन का निर्माण कम कर दिया। अब एक फिर कोविड की दूसरी लहर के बीच इंजेक्शन की मांग बड़ी है।
दिल्ली और यूपी से आ रहे फोन
रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए दिल्ली और यूपी से स्थानीय लोगों के रिश्तेदरों के फोन आ रहे हैं। लोग स्थानीय मेडिकल स्टोर संचालकों से इंजेक्शन के लिए संपर्क कर रहे हैं। हाल यह है कि एक इंजेक्शन की एक वॉयल के लिए लोग दिल्ली से हरिद्वार आने के लिए तैयार हैं। अनिल अरोड़ा ने बताया कि उनके पास इंजेक्शन के लिए रोजाना 300 से 350 फोन आ रहे हैं।
कालाबाजारी की नहीं है संभावना
अनिल अरोड़ा ने बताया कि हरिद्वार में अब जब रेमडेसिविर इंजेक्शन उपलब्ध ही नहीं है तो ऐसे में कालाबाजारी का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन उपलब्ध होने पर मेडिकल स्टोर संचालकों निर्धारित कीमत पर ही बिक्री करने के लिए कहा गया है। इंजेक्शन की कीमत चार-छह हजार रुपये के बीच है।
अधिकृत कोविड अस्पताल और जिला अस्पताल में रेमडेसिविर का इंजेक्शन नहीं है। गंभीर स्थिति में कोविड संक्रमित को ऋषिकेश एम्स और दून अस्पताल में भेजा जाता है।
-डॉ. अर्जुन सिंह सेंगर, मेलाधिकारी, स्वास्थ्य