प्रदेश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसकी रोकथाम के प्रबंधन एवं मॉनिटरिंग के लिए सभी मंत्रियों को जिलेवार जिम्मेदारियां सौंप दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी मंत्री संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर हर संभव कदम उठाएंगे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज को हरिद्वार, डॉ.हरक सिंह रावत को पौड़ी व रुद्रप्रयाग, बंशीधर भगत को नैनीताल, यशपाल आर्य को ऊधमसिंह नगर, सुबोध उनियाल को टिहरी, बिशन सिंह चुफाल को बागेश्वर व पिथौरागढ़ जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को देहरादून, अरविंद पांडे को चंपावत, राज्यमंत्री डॉ.धन सिंह रावत को चमोली, रेखा आर्य को अल्मोड़ा और राज्यमंत्री यतिश्वरानंद को उत्तरकाशी जिले की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि सभी मंत्री अपने जिलों की जिम्मेदारी लेते हुए संबंधित जिलाधिकारियों से समन्वय बनाकर कोरोना की रोकथाम के लिए काम करेंगे।
प्रदेश में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की जरूरत : प्रीतम
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। सरकार और सरकारी तंत्र पटरी पर नहीं है। राज्य में स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने की जरूरत है।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना महामारी की रोकथाम एवं संक्रमित मरीजों को पर्याप्त इलाज देने में पूरी तरह से असफल रही है।
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि राज्य में कोरोना से होने वालीं मौतों की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक पहुंच गई है। वहीं रिकवरी रेट में 23 फीसदी की गिरावट आई है और मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रीतम ने कहा कि सरकार को सलाह दी गई थी कि कोरोना की बड़े पैमाने पर जांच की जाए। लेकिन इस दिशा में कुछ नहीं किया गया।
स्थिति यह है कि पिथौरागढ़ में कोरोना का परीक्षण एक लाख में 48 किया गया। इससे पता चलता है कि सरकार कितनी संवेदनशील है। आरोप लगाया कि लोगों का जीवन बचाने के बजाए सरकार सच्चाई छिपाने में लगी है। प्रदेश के अस्पतालों में कोरोना मरीज बेड और आक्सीजन के लिए तरस रहे हैं। इंजेक्शन की कालाबाजारी हो रही है। वेंटीलेटर और जीवन रक्षक दवाओं की कमी के चलते लोगों की जान जा रही है, लेकिन सरकार इन सबके प्रति गंभीर नहीं है।