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Coronavirus in Uttarakhand : कोविड काल में मनरेगा के जरिये गांवों में पहुंचा 450 करोड़ रुपया

Fri, 04 Sep 2020 10:53 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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मनरेगा - फोटो : amar ujala
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कोविड के इस दौर में प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने का काम मनरेगा के जरिये भी हुआ है। पिछले चार माह में ही ग्रामीण इलाकों में करीब 450 करोड़ रुपया खर्च किया गया है। इसमें से करीब 225 करोड़ रुपये तो मजदूरी ही अदा की गई। 

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Coronavirus in Uttarakhand : प्रदेश में एक माह में दोगुने हो गए कोरोना के सक्रिय मरीज

कोविड काल मेें मनरेगा से मिले सहारे को दूसरे तरीके से भी समझा जा सकता है। प्रदेश में मनरेगा का इस बार का बजट करीब 700 करोड़ रुपये का है। कोरोना संक्रमण के बाद लॉकडाउन दो में 22 अप्रैल से मनरेगा के तहत काम शुरू किया गया था। पिछले चार माह में ही करीब 450 करोड़ रुपये खर्च किया जा चुका है। 
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एक लाख से अधिक प्रवासी जुड़े योजना से

मनरेगा ने कोविड काल में प्रवासियों को भी सहारा दिया है। तीन सितंबर तक प्रदेश में एक लाख से अधिक नए पंजीकरण इस योजना के तहत हुए। मनरेगा के नोडल अधिकारी मोहम्मद असलम के मुताबिक इसमें से 99 प्रतिशत प्रवासी ही हैं। इसमें से करीब 83 हजार ऐसे हैं, जिन्होंने किसी न किसी रूप में मनरेगा में काम करके मजदूरी भी हासिल की है।

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अब तक 6.75 लाख को मिल चुका है काम

इस योजना के तहत अब तक कुल मिलाकर 6.75 लाख लोगों को काम दिया जा चुका है। सबसे अधिक काम टिहरी में किया गया, जहां 1.15 लाख लोगों ने इस योजना का लाभ लिया।

दूसरे नंबर पर पौड़ी है जहां करीब 85 हजार लोगों ने मनरेगा के तहत काम किया। इन लोगों ने 10 दिन से लेकर 15 दिन तक का काम किया। कुल मिलाकर मजदूरी पर मनरेगा के तहत करीब 225 करोड़ रुपये खर्च हुए।

मुख्य बिंदु

-योजना का 700 करोड़ का बजट
-योजना में कुल खर्च हुआ 450 करोड़
-सवा 200 करोड़ देनदारी भी
-20 हजार मुर्गीपालन शेड बनाकर देंगे
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